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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. डा. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में जल्द ही फायर फाइटिंग सिस्टम काम करने लगेगा। अस्पताल की किसी भी मंजिल के वार्ड या कमरों में आग लगी, तो इस पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा। अस्पताल को आगजनी से बचाने के लिए एक प्लांट लगाया गया है जिससे बिल्डिंग के सभी कोनों पर नियंत्रण रखा जाएगा।
देश के एम्स और तमाम बड़े अस्पतालों की तर्ज पर आंबेडकर को भी फायर प्रूफ बनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। आग बुझाने के लिए फायर प्लांट में एक लाख लीटर की क्षमता वाली पानी की टंकी स्थापित की गई है। इसका पानी प्रेशर युक्त पाइप के जरिए सभी वार्डो तक पहुंचेगा। इसके लिए बिल्डिंग के चारों ओर मोटी पाइप लाइन बिछाई गई है।
यह लाइन भवन के चारों कोनों तक सभी वार्ड और आपरेशन थिएटरों तक खींची गई है। इससे पानी की सप्लाई होगी और जिस जगह पर भी आग लगे, पाइप लाइन के नॉब के जरिए उसे बुझाया जा सकेगा। पानी के अलावा कार्बन डाइआक्साइड और फोम से भी आग बुझाई जाएगी। इसके लिए भी अलग-अलग पाइप लाइन बिछाई गई है। दोनों के लिए फायर प्लांट में टंकी लगाई जाएगी।
नई आटोमेटिक सेंसर तकनीक
आग बुझाने के लिए अस्पताल में एक नई तकनीक काम करेगी, जिसे आटोमेटिक सेंसर सिस्टम या टेंपरेचर सिस्टम का नाम दिया गया है। सभी संवेदनशील वार्डो में एक सेंसर लगाया जाएगा। इससे उस जगह पर अगर धुआं या आग की लपटें उठीं, तो सायरन बजेगा। कमरे का तापमान अगर 68 डिग्री से अधिक हुआ तो कार्बन डाई आक्साइड गैस और फोम का अपने आप छिड़काव शुरू हो जाएगा। अफसरों का कहना है कि यह सिस्टम देश के तमाम बड़े अस्पतालों में लगा है।
डेढ़ करोड़ का प्लांट
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक फायर फाइटिंग प्लांट के पूरे सिस्टम में एक करोड़ 60 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसकी जिम्मेदारी कोलकाता की फायर प्लांट कंपनी को दी गई है। इसे स्थापित करने के लिए छह माह दिए गए थे। चार माह से ज्यादा बीत चुके हैं और दिसंबर तक सिस्टम काम करने लगेगा। अफसरों ने बताया कि अगले पांच सालों तक कंपनी ही प्लांट का मेंटेनेंस करेगी। स्टाफ भी उसी के लगेंगे।
आग बुझाने के 3 सिस्टम हाईडेंट
हाईडेंट सिस्टम से आग पानी की मदद से बुझाई जाएगी। पाइप लाइन में पानी की सप्लाई होगी, जिसे प्रेशर से आग प्रभावित जगह पर डाला जाएगा। इसके लिए एक लाख लीटर की पानी टंकी तैयार की गई है, जिसमें 24 घंटे पानी की व्यवस्था होगी।
स्प्रिंकल सिस्टम
स्प्रिंकल सिस्टम के जरिए आग बुझाने के लिए पानी की फुहारों की मदद ली जाएगी। पाइप लाइन में पानी प्रेशर से आएगा, जिससे पानी की फुहार निकलेगी। आग प्रभावित बड़े हिस्से पर काबू पाने में इसकी मदद ली जाएगी।
टेंपरेचर सिस्टम
टेंपरेचर सिस्टम यानी आटोमेटिक सिस्टम, जो कमरों के तापमान के अनुसार काम करेगा। अस्पताल की संवेदनशील जगहों आग लगी तो वहां का तापमान 68 डिग्री होते ही यह सिस्टम एक्टिव हो जाएगा। कमरे में लगे सेंसर के जरिए उस जगह पर कार्बनडाइआक्साइड और फोम का छिड़काव शुरू हो जाएगा।
दिसंबर तक सिस्टम काम करने लगेगा। यह सुरक्षित और फायदेमंद सिस्टम है। न तो कोई फायरब्रिगेड का टेंशन और न ही आग से बड़े नुकसान की संभावना होगी।
-डा. सुनील गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी, आंबेडकर अस्पताल