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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. जेल विभाग चार सहायक जेलरों को सस्पेंड करके उलझन में फंस गया है। इन चारों अफसरों को राज्य शासन के तबादला आदेश का पालन न करने के आरोप में निलंबित किया गया है। सस्पेंक्शन आदेश जारी होने के बाद पता चला कि उनके खिलाफ गलत कार्रवाई हो गई। दरअसल इन अफसरों को जेल अधीक्षकों ने रिलीव ही नहीं किया था।
जेल विभाग के जानकारों ने बताया कि चारों अफसरों ने रिलीव होने के लिए एक दो नहीं बल्कि एक-एक दर्जन बार चिट्ठियां मुख्यालय लिखी थीं। उन्होंने हर चिट्ठी में यही आग्रह किया था कि उन्हें नई जगह के लिए रिलीव किया जाए। सभी सहायक जेलरों ने चिट्ठियां अपने जेल अधीक्षकों के मार्फत भेजीं। सूत्रों के मुताबिक अधीक्षकों ने भी उन्हें इसलिए रिलीव नहीं किया क्योंकि उनकी जगह जिन्हें आना था, वे नहीं पहुंचे।
यह सिलसिला कुछ दिन चला। जेल मुख्यालय ने अचानक चारों असिस्टेंट जेलरों को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए, तब हड़कंप मचा। सहायक जेलरों ने खुद डीजी एसके पासवान से मिलकर सारी हकीकत बयान की। जानकारों का कहना है कि डीजी खुद यह जानकार हैरान रह गए। अब सस्पेंड अफसरों को बहाल किए जाने की प्रक्रिया की जा रही है। साथ ही इस बात का पता लगाया जा रहा है कि आखिर इतने अधिकारियों के खिलाफ गलत कार्रवाई कैसे हो गई।
इन पर गिरी गाज
जेल विभाग ने डीके ध्रुव, एसएल जांगड़े, गजाधर पटेल और एके वाजपेयी को निलंबित किया था। इनमें डीके ध्रुव अभी बैकुंठपुर में पदस्थ हैं। उन्हें बलौदाबाजार की उप जेल भेजा गया था। श्री जांगड़े रामानुजगंज जेल में पदस्थ हैं। उनका तबादला बैकुंठपुर किया गया था। श्री पटेल रायगढ़ में हैं। उनका ट्रांसर्फर रामानुजगंज तथा बलौदाबाजार में पदस्थ श्री वाजपेयी को रायगढ़ भेजा गया था।
कैसे हुई गड़बड़
जानकारों ने बताया कि पुलिस महकमे में तबादले के बाद बड़े पैमाने पर अफसरों ने नई पदस्थापना में ज्वाइनिंग नहीं दी थी। इससे नाराज सरकार ने पुलिस के साथ-साथ जेल विभाग से भी ऐसे अफसरों की सूची मंगवाई। जेल विभाग ने रिलीव होने की पड़ताल किए बिना ही अफसरों के नाम भेज दिए। शासन स्तर पर निर्देश जारी होने के बाद अफसरों को निलंबित कर दिया गया।