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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. झारखंड सीमा पर सरगुजा के जंगल एक बार फिर नक्सली जमावड़े के गवाह बने, लेकिन इस बार फोर्स ने अतिवादियों के पांव नहीं टिकने दिए। सीमा से 10 किमी अंदर तक आ आए अलग-अलग नक्सली गुटों को जबर्दस्त मुठभेड़ों के बाद फोर्स ने झारखंड तक खदेड़ दिया हैं। खुफिया रिपोर्ट हैं कि करीब चार सौ नक्सलियों ने चुनाव के दौरान अलग-अलग इलाके में घुसने की कोशिश की थी। इन्हीं में से एक जत्थे के एंबुश में आईजी बीएस मरावी घायल हो गए थे।
सरगुजा के बड़े हिस्से में घुसपैठ बनाने के बाद जब माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी)और पीपुल्स वार ग्रुप (पीडब्लूजी) का विलय हुआ और सीपीआई (माओ) का जन्म हुआ, तब बलरामपुर, रामानुजगंज, जशपुर और कोरिया तक नक्सल गतिविधियां चरम पर थीं। 2003 के बाद पुलिस ने सरगुजा पर जबर्दस्त दबाव बनाया और दो साल के भीतर भीम कोड़ाकू जैसे सारे नक्सल नेताओं को या तो ढेर कर दिया, या फिर वे भाग खड़े हुए। सरगुजा से भागकर झारखंड में शिफ्ट हो गए नक्सलियों ने नार्थ छत्तीसगढ़ एरिया कमेटी भंग कर छत्तीसगढ़-झारखंड बार्डर एरिया कमेटी बनाई।
फिलहाल नक्सलियों की यही कमेटी सक्रिय है, जिसकी चाबी झारखंड के नक्सलियों के पास है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव में फोर्स की गहमागहमी और सरकारी अफरातफरी का फायदा उठाने के लिए नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की साजिश की थी, ताकि पुराने गढ़ पर कब्जा हो सके। लेकिन यह साजिश आईजी पर हमले के साथ ही फूट गई। हमले के बाद डीजीपी विश्व रंजन ने पुलिस के तमाम आला अफसरों की मुख्यालय में गोपनीय बैठक ली। इसमें तय हुआ कि चुनाव के लिए भेजी जाने वाली फोर्स के साथ चार-पांच बटालियनें अतिरिक्त भेजी जाएं जो वहां बार्डर में नक्सल आपरेशन करें। पुलिस को अंदेशा था कि 15 से 20 नवंबर के बीच नक्सली बड़ी संख्या में झारखंड से छत्तीसगढ़ में घुसने की तैयारी कर रहे हैं।
एंटी लैंडमाइन वेहिकल भेजे : चुनाव के दौरान पुलिस ने काफी खुफिया तरीके से करीब दो दर्जन एंटी लैंडमाइन वेहिकल झारखंड सीमा से लगे इलाकों में तैनात किए थे। सीआरपी की दर्जनों पैदल पार्टियां सीमा पर लगाई गईं। सूत्रों ने बताया कि 18 से 20 तारीख के बीच नक्सलियों के कम से कम आठ दस्ते अलग-अलग स्थानों पर छत्तीसगढ़ सीमा में दाखिल हुए। लेकिन अधिकांश दस्तों का चार-पांच किमी पर ही फोर्स से सामना हो गया। फोर्स ने इन जत्थों पर जोरदार तरीके से हमले किए और दस्तों को भागना पड़ा। पुलिस को अंदेशा है कि आने वाले दो-तीन महीने में नक्सली एक बार फिर सरगुजा में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। इस घुसपैठ से निपटने के लिए पुनर्मतदान के बाद कुछ इलाकों में फोर्स की नए सिरे से तैनाती होगी।