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बालों में धागे की तरह पिरोते हैं बाल

दुर्ग. आधी से ज्यादा जिंदगी बही-खातों के बीच गुजारने वाले 62 साल के बच्चा सिंह इन दिनों सिर के बालों के साथ सुई-धागे का खेल खेल रहे हैं। सिंह कुछ मिनटों के अंदर धागे से कई गुना पतले अपने बाल में छेद करने के बाद उसी छेद से दूसरा बाल पिरो देते हैं।

सहकारी समितियों के खातों का आडिट करने वाले शीतलानगर निवासी बच्च सिंह चार साल पहले शासकीय सेवा से रिटायर हुए हैं। उन्होंने 2008 के लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस में राजकोट में रहने वाले दीपक भट्ट के बारे में पढ़ा, जो सिर के बालों में छेद करने के बाद उसमें से दूसरा बाल धागे की तरह पिरो देते हैं। हमेशा कुछ अलग करने की कोशिश करने वाले बच्च सिंह ने इसे चुनौती की तरह लिया और अपने सिर के बाल में छेद करने की कोशिश शुरू कर दी।

बच्चा सिंह भी मानते हैं कि यह काम बहुत थका देने वाला होता था। कई बार उनको लैंस लेकर दिन में 3 से 4 घंटे तक एकाग्र होकर बैठना पड़ता था। महीने भर चली कोशिश में उन्होंने 800 से भी ज्यादा बालों का इस्तेमाल किया। पत्नी प्रभादेवी सिंह समेत घर के बाकी सदस्य शुरू में इसके खिलाफ थे। उनके बेटे संजय सिंह ने बताया कि पिता का कुछ समय पहले ही मोतियाबिंद का आपरेशन हुआ था। उम्र को देखते हुए परिजन चाहते थे वे ऐसे कामों से दूर रहे, जिससे आंखों पर दबाव पड़ता हो। पर सिंह नहीं माने।

चित्रकारी और फोटोग्राफी के शौकीन बच्च सिंह की एक महीने तक चली कोशिश आखिर रंग लाई। कुछ दिन पहले जब उनको बाल में बनाए गए छेद से दूसरे बाल को पिरोने में सफलता मिली तो पूरा परिवार बच्च सिंह की खुशी में शामिल हो गया।

लगातार अभ्यास से बच्च सिंह ने इसमें महारत हासिल की है। ऐसा करने में अब उनको बमुश्किल दो से पांच मिनट का ही समय लगता है। बाल के छेद से वह आलपिन भी गुजार देते हैं। उनका इरादा अपनी सफलता को लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस में दर्ज करवाने का है। उनको पुराने सिक्कों और डाक टिकटों के संग्रह का भी शौक है। कई प्रदर्शनियों में सिंह ने अपने संग्रह को पेश किया। डाक टिकटों की मदद से उनके द्वारा तैयार किए गए भारत के मानचित्र को दूरदर्शन ने अपने एक कार्यक्रम में कवर किया था।





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