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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur अंबिकापुर. लोगों को अपना एक अदद आशियाना बनाने में पसीने छूट रहे हैं। बाजार में छाई मंदी व निर्माण सामग्रियों की कीमतों में आए दिन हो रहे उतार-चढ़ाव का असर भवन निर्माण पर पड़ा है। इसके बावजूद जिसने ठान ली है वे अपना घर हर कीमत पर बनाने में भिड़े हुए हैं।
मकान बनाने का ख्वाब मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी मंजिल होती है। कुछ वर्ष पूर्व की स्थिति के ठीक उलट आज बाजार का रुख बना हुआ है। सब कुछ जुटाकर भी एक छोटा सा घर बनाने में लोगों क ो छक्के छूट रहे हैं। निर्माण सामग्रियों की कीमतें ज्यादा तो है हीं, रोज इनके भाव ऊपर-नीचे हो रहे हैं। मकान बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाली सामग्रियों में स्टील व सीमेंट की कीमत पूरे बजट को प्रभावित करती है।
हाल के दिनों में ईंट, गिट्टी, बालू के भी रेट बढ़े लेकिन इनकी कीमतें निर्माण बजट को ज्यादा असर नहीं कर पाती हैं। लिहाजा लोगांे की नजरें छड़ व सीमेंट के रेट पर हमेशा टिकी रहती है। इस वर्ष दोनों के भाव ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। जहां ब्रांडेड स्टील की कीमत 49 सौ रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गई वहीं लोकल स्टील की कीमत 47 सौ रुपए तक पहुंची। इससे मध्यम वर्गीय परिवार का बजट चरमरा गया। यही स्थिति शासकीय कार्यो की भी रही। ओवर बजट के कारण कई ठेकेदारों ने कार्य पूरा करने से हाथ खड़ा कर लिया। इसके बावजूद बाजार में उठाव की तेजी बनी रही।
इस दौरान बीजिंग ओलंपिक के अलावा अंतर्राष्ट्रीय मांग के कारण भारी मात्रा में स्टील विदेश भेजने का असर भी पड़ा। यहां के स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि उस वक्त बिक्री पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। मनेंद्रगढ़ रोड स्थित बंसल ट्रेडिंग के संचालक धीरज बंसल बताते हैं कि पहले के मुकाबले आज बाजार ठंडा है। अंतर्राष्ट्रीय मंदी का असर भी दूसरा प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि दीवाली के आसपास छड़ की कीमत जब 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल हुई तो उठाव में कुछ तेजी आई लेकिन इसे बाद भी कुछ लोग कीमतें और कम होने का इंतजार करते रहे। आज स्थिति यह है कि ब्रांडेड छड़ की कीमत करीब 38 सौ के आसपास पहुंच गई है।
इसके अलावा बीच में चुनाव पड़ने व फसल कटाई के कारण भी निर्माण कार्य मंदा रहा। इस बीच रेट गिरने से फैक्ट्री घाटे में आ गए और उन्होंने उत्पादन को कम कर दिया। आज स्टील की कीमतें बढ़ने का यही कारण माना जा रहा है। उन्होंने इसके बावजूद कुछ दिनों में उठाव में तेजी आने की संभावना व्यक्त की। निर्माण बजट को प्रभावित करने वाले दूसरी सामग्री सीमेंट की कीमतें हाल के दिनों से कुछ कम है। ब्रांडेड कंपनी की सीमेंट के रेट मंदी के कारण गिरे हैं।
दुकानदान कुछ और कीमत घटने की उम्मीद जता रहे हैं। लेकिन रेट स्थिर रहने की ज्यादा संभावना है। नगर में कंस्ट्रक्शन पर इसका असर तो पड़ा है लेकिन कार्य फिर भी जारी है। आज मध्यम वर्गीय परिवार बने बनाए घरों को भी प्राथमिकता देने लगा है। निर्माण कार्य की झंझटों से बचने वह कुछ पैसा ज्यादा देकर सिरदर्द मोल लेना नहीं चाहता। बहरहाल दुकानदार इस उम्मीद पर है कि चुनाव समाप्त होने के बाद सभी प्रकार के कार्यो में तेजी आएगी चाहे कीमतें कै सी भी हो।
शहर में ज्यादा मुश्किल नहीं- राव
इस संबंध में आर्किटेक्ट लक्ष्मण राव ने कहा कि कंस्ट्रक्शन के लिहाज से यह समय अनुकूल है। उन्होंने बताया कि रेट बढ़ने का असर शहरी निर्माण कार्यो पर कुछ खास नहीं हुआ लेकिन दूर-दराज में हो रहे कार्य कुछ प्रभावित हुए। जो लोग मकान बनवा रहे हैं वे ले-देकर निर्माण जारी रखे हुए हैं। श्री राव के अनुसार घर निर्माण में 25 प्रतिशत बजट स्टील पर खर्च होता है। लिहाजा इसकी कीमतें निर्माण बजट को प्रभावित करती है।