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Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood परदे के पीछे.
लोकप्रिय साहित्य और सिनेमा में चिट्ठी का बहुत महत्व रहा है क्योंकि कबूतरों के माध्यम से संदेश भेजने से लेकर डाक-तार विभाग के विकास तक यह संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। मोबाइल और अन्य नए माध्यमों के विकास के बाद खत लिखना कम हो गया है।
डाक-तार विभाग की सक्षमता के बावजूद कोरियर का विकास कारपोरेट शैली का हिस्सा बन गया, क्योंकि इस शैली में किफायत का कोई स्थान नहीं है। चंद पैसों के बदले 15 रुपए खर्च किए जाने के लिए समय की दुहाई दी गई। आज के दौर में लोगों को लिखना पसंद नहीं है। अत: पत्र व्यवहार दकियानूसी मान लिया गया है। कुछ ही वर्षो में लोग लिखना भी भूल जाएंगे। हाल ही में श्याम बेनेगल ने पैसा लेकर खत लिखने वाले नायक को लेकर ‘वेलकम टू सज्जनपुर’ बनाई थी।
साहित्य और सिनेमा में कई किस्से हैं कि एक खत गलती से कालीन के नीचे चला गया और 15 वर्ष बाद मिला परंतु तब तक रिश्ते फना हो चुके थे। खत के गुम होने या गलत हाथों में जाने के आधार पर कई फिल्में बनी हैं।
विमल राय की शशि कपूर अभिनीत फिल्म का नाम ही था ‘प्रेम पत्र’ और ‘संगम’ में नायक हिंदी में लिखा पत्र नहीं पढ़ पाता और इसी गलतफहमी के आधार पर चार घंटे की फिल्म रची गई है जिसमें मोहम्मद रफी ने कमाल किया था-‘यह मेरा प्रेमपत्र पढ़कर कहीं नाराज ना होना।’ महेश भट्ट की फिल्म ‘नाम’ में विदेश में देश से आए खत के आधार पर आनंद बक्शी के रचे गीत ‘चिट्ठी आई है’ सुनकर आंसू रोकना मुश्किल होता था। जावेद अख्तर ने ‘बार्डर’ में ‘संदेशे आते हैं’ लिखकर फिल्म की बॉक्स आफिस ताकत बढ़ा दी थी। राजेश खन्ना भी ‘डाकिए’ की भूमिका कर चुके हैं। ‘तीसरी कसम’ में गीत है ‘चिट्ठियां हो तो हर कोई बांचे, भाग ना बांचे कोए।’
दूरदर्शन पर प्रस्तुत ‘मालगुडी डेज’ में एक डाकिया चाचा की मृत्यु की खबर देने वाले खत को रोक लेता है क्योंकि अनेक कठिनाइयों के बाद गरीब भतीजी का विवाह हो रहा था। खत उस विवाह को रोक सकता था। पंडित जवाहरलाल नेहरू जेल में बैठकर अपनी पुत्री इंदिरा के नाम खत लिखकर उसे विश्व इतिहास समझने में सहायता करते हैं।
किसी निर्जन द्वीप पर फंसा व्यक्ति खत को बोतल में बंद कर समुद्र में फेंकता है जो वर्षो बाद किसी किनारे पर जा पहुंचती है। खत के साथ अनेक कहानियां जुड़ी हैं। खत मानवीय याद की महत्वपूर्ण ग्रंथि रहे हैं। खतों के सहारे कई प्रेमियों ने लंबी जुदाई को सह लिया। राजकपूर की ‘हिना’ में अपने प्रेमी की भारत में बसी प्रेमिका के नाम लिखी चिट्ठी पर आधारित गीत था ‘चिट्ठियां ले जा लेजा संदेशा सोने यार का।’ पत्र व्यवहार को दकियानूसी समझा जाना सचमुच अफसोस की बात है। मोबाइल पर दिए गए संदेश में वह रोमांस कहां जो खत में होता था। निदा फाजली का गीत है ‘ये खत नहीं बदलती ऋतु है, हंसता हुआ सावन है।’