|
नई दिल्ली. कर्ज की किल्लत झेल रही मझोली इकाइयों के विकास की गति बढ़ाने के लिए सरकार के साथ-साथ रिजर्व बैंक ने भी कमर कस ली है। इसके तहत मझोली इकाइयों के लिए 20,000 करोड़ रुपये की विशेष रिफाइनेंस खिड़की खोलने पर विचार किया जा रहा है।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि विशेष रिफाइनेंस खिड़की खुल जाने से बैंक मझोली इकाइयों को लोन देने के लिए निश्चित तौर पर आगे आएंगे। कारण यह है कि इस प्रस्तावित सुविधा के तहत बैंकों को रियायती दर पर रिफाइनेंस मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के लिए जहां एक ओर विशेष ब्याज दर तय की जा रही है, वहीं दूसरी ओर अन्य विवरण भी तैयार किए जा रहे हैं। रिजर्व बैंक संभवत: अगले 10-15 दिनों में इस सुविधा की घोषणा कर देगा।
इस सुविधा से एक साथ दो लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे जहां एक तरफ मझोले उद्योगों को बहुप्रतीक्षित कर्ज मिलने लगेंगे, वहीं दूसरी तरफ बैंकों के लिए भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को निर्धारित 40 फीसदी कर्ज मुहैया कराना आसान हो जाएगा। मझोली इकाइयों को कर्ज के अभाव के साथ-साथ घटती घरेलू मांग और निर्यात में भारी गिरावट की समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है।