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अमृतसर जीएनडीयू २४ नवंबर को अपना ३९वां स्थापना दिवस मना रहा है। अपने इस शैक्षणिक सफर में इसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी नाम कमाया है। भविष्य में विश्व स्तर पर बहुत कुछ करने के लिए भी यूनिवर्सिटी प्रशासन कटिबद्ध है।
यूनिवर्सिटी ने अपने शानदार इतिहास में गुरु के संदेश को प्रसारण और विज्ञान, सूचना टेक्नोलॉजी, औद्योगिक टेक्नोलॉजी, आर्ट्स, मैनेजमेंट, वातावरण, प्लानिंग और आर्किटेक्चर के क्षेत्रों में भी अहम योगदान डाला है। राष्ट्रीय मूल्यांकन और मान्यता कमेटी (नैक) की ओर से वह दो बार सर्वोच्च (ए) ग्रेड भी हासिल कर चुकी है।
नैतिकता और परंपराएं अहम मुद्दा
आज के विश्वीकरण के इस युग में ज्ञान की दौड़ लगी हुई है, उच्च शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और अलग-अलग देशों के शैक्षणिक संस्थान आज के माहौल में शिक्षा को कैसे स्तरीय बनाया जाए, के बारे में गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ऐसे में नैतिक मूल्यों और परंपराओं को बनाए रखना एक बड़ा मुद्दा है। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का कहना है कि वक्त की जरूरत है देश में चल रहे खोज कार्यो को और उत्साहित किया जाए।
हर चैलेंज को तैयार
आज से ३८ साल पहले अमृतसर में श्री गुरु नानक देव जी के ५क्क्वें जन्म दिवस के अवसर पर २४ नंवबर, १९६९ को यूनिवर्सिटी स्थापना हुई थी। यूनिवर्सिटी के इस समय ३४ अध्यापक विभाग, दो क्षेत्रीय कैंपस और तीन अपने कालेज हैं। इसके साथ १४९ कालेज और १क्५ एसोसिऐट इंस्टीच्यूट संबंधित है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के सिलेबस वाले ३क्क् से अधिक कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं।
सहेजे रखा है इतिहास
यूनिवर्सिटी की ओर से पंजाबी भाषा और सभ्याचार की प्रफुल्लिता करने के लिए विशेष यत्न किए जा रहे हैं। हर साल पंजाबी सप्ताह मनाया जाता है और प्रसिद्ध लेखकों को अध्यापकों और विद्याíथयों से रू-ब-रू करवाया जाता है। यूनिवर्सिटी में स्थापित फोकलोर म्यूजियम में पुराने रिवायती बर्तन, फुलकारियां और पुराने एतितिहासिक सिक्कों के साथ-साथ और भी दुर्लभ वस्तुएं संभाली गई हैं।
शोध पर भी खास
जीएनडीयू क्षेत्र की पहली यूनिवर्सिटी है, जिसने नौजवान अध्यापक वर्ग को खोज कार्यो के लिए उत्साहित ही नहीं करती है बल्कि २५-२५ हजार रुपए की ग्रांट भी देती है। अब तक २क् लेक्चरारों को यह ग्रांट दी जा चुकी है। यूनिवर्सिटी ने खोज को उत्साहित करने के लिए ११क् मिलियन रुपए का फंड कायम किया है और विभागी खोज प्रोजेक्टों के लिए ३.२७ मिलियन की ग्रांट मुहैया करवाई है। यूनिवर्सिटी ने इंटरनेट की सहूलियत भी अध्यापक वर्ग को दी है और खोज के लिए विशेष लाभ भी दिए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने खेलों के क्षेत्र में देश की सर्वोच्च मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्राफी २क् बार जीत कर अपनी खेल क्षमता का परिचय दिया है। इसी तरह से इसने सात बार ‘बेस्ट कल्चरल यूनिवर्सिटी’ का खिताब भी हासिल किया है।
यूनिवर्सिटी को हरेक क्षेत्र में विश्व स्तर पर पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए प्रयास जारी हैं। हमें इस बाबत सफलता भी मिल रही है।
—डा. जयरूप सिंह, वीसी
यूनिवर्सिटी दिन दूना रात चौगुनी तरक्की कर रही है। वैश्वीकरण के इस दौर में हम सब मिल कर उसे तरक्की की राह पर ले जाएंगे।
—डा. आरएस बावा, रजिस्ट्रार