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पंजाब दी विरासत ते शराब दी भट्ठी!

बठिंडा. पंजाब की विरासत क्या है इस सवाल का जवाब पाने में आप चूक गए। मालवा हैरिटेज फाउंडेशन की ओर से खेल स्टेडियम में आयोजित विरासत मेले में आपको इसके सभी रंग देखने को मिलते जहां शराब की भट्ठी लगाने से लेकर मदिरा पान के बाद किस तरह की हरकतें पीने वाला कर सकता है उसकी झलक भी देखने को मिलती।

मेले में शराब की भट्ठी और उसे निकालने के तरीके के अलावा वैलियां दा बेहड़ा में कुछ लोगों को शराब पीकर बंदूकों का प्रदर्शन करते दिखाया गया। मेले में विरासत के नाम पर ऐसी चीजों के प्रदर्शन पर यहां के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। मजेदार है कि जिला पुलिस नशे के खिलाफ अपना अभियान चलाए हुए है। ऐसे में विरासत मेले में नशाखोरी दिखाना उस अभियान को पलीता लगाने जैसा है। मेले के एक प्रबंधक का कहना था कि वे लोगों को पुरानी विरासत से जुड़े कुछ पहलू दिखा रहे हैं।

क्या कहते हैं बुद्धिजीवी

पंजाबी विश्वविद्यालय के रीजनल सैंटर के प्रभारी डॉ. सतनाम जस्सल ने मेले में जिस तरह का प्रदर्शन किया गया उस पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि पंजाबी सभ्याचार लोक हितैषी है। नशाखोरी जैसी चीजें हमारी विरासत का हिस्सा कैसे हो सकती हैं। नशाखोरी का प्रदर्शन गुरमति धारा का अपमान है।

प्रोफैसर एनके गोसाई ने कहा कि जिस चीज से गुरु ने दूर रहने के लिए कहा हो वह हमारी विरासत का अंग कैसे हो सकती है? इसकी जगह कुछ विरासत से जुड़ी कुछ अन्य चीजें दिखाई जा सकती थीं। बठिंडा विकास मंच के प्रधान राकेश नरुला ने कहा कि मेले में भट्टी दिखाना गलत कदम था। नौजवान सुधार सभा के महासचिव धनश्याम दास धन्ना ने कहा कि जो कुछ प्रदर्शित हुआ वह युवा पीढ़ी को गुंडागर्दी की तरफ प्रेरित करता है।

विरासत मेले में शराब भट्टी व बैलिया दा बेहड़ा दिखाना विरासत नहीं है। आगे से हम इस बात का ध्यान रखेंगे।

-एलआर नैयर, कार्यकारी प्रधान मालवा हैरीटेज फाउंडेशन





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