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नई दिल्लीवित्तमंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि देश में मुद्रास्फीति का सबसे मुश्किल दौर खत्म हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी की कीमतें नीचे आने से मुद्रास्फीति की दर में नरमी जारी रहने का अनुमान है।
मजबूत रहेगी विकास दर :
उन्होंने यहां आयोजित इकॉनोमिक एडीटर्स के सम्मेलन में कहा कि इस वर्ष घरेलू विकास दर सात से आठ फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है, जो मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मजबूत कही जा सकती है।
कमोडिटी में गिरावट :
इस मौके पर मंत्रालय ने एक रिपोर्ट भी जारी की, जिसमें कहा गया था कि मंदी के कारण दुनियाभर में क्रूड सहित अन्य महत्वपूर्ण कमोडिटी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। मुद्रास्फीति में नरमी से इनपुट लागत घटेगी व कंपनियों की आंतरिक आमदनी में वृद्धि होगी। कंपनियों की लाभप्रदता बढ़ेगी।
क्रूड सस्ता होने का असर :
दुनियाभर में उर्वरक, रसायन, मानव निर्मित फायबर, कोयला, गैस, धातु, खाद्य तेल, तिलहन, चीनी, प्राकृतिक रबर व कपास आदि वस्तुएं सस्ती हुई हैं। वित्तीस संकट का प्रभाव :
मध्यम असर : मैन्यूफैक्चरिंग, निर्यात, निर्माण, परिवहन, बीमा, बैंकिंग, व्यापारी सेवांए व रियल एस्टेट।
तटस्थ असर : कृषि, बिजली, दूरसंचार, कारोबार, मनोरंजन आदि।
सकारात्मक असर : समुदाय व सेवा क्षेत्र (डिफेंस व समाज सेवा)।
नगण्य असर : खनन क्षेत्र
(नोट : यह विवरण वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट पर आधारित है।)