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कैथल.
यदि आप सेहत के प्रति फिक्रमंद और चावल के शौकीन हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। अब जल्दी ही 16 पौष्टिक तत्वों से युक्त जैविक बासमती चावल बाजार में आने वाला है। रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से फसलें जहरीली होने लगी हैं और इसका स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
इसी को देखते हुए हैफेड और राजस्थान की एक एनजीओ मोरारका जीडीसी जयपुर फाउंडेशन ने जैविक चावल बाजार में लाने का फैसला किया। शुरुआती दौर में इसके लिए कैथल, कुरुक्षेत्र और करनाल के 70 गांवों को चुना गया और 1370 किसानों के साथ अनुबंध किया गया। इन किसानों ने 1698 एकड़ में जैविक बासमती धान की खेती की और माजूदा समय में धान की यह फसल खेतों में लहलहा रही है। नए साल में यह चावल मार्केट में आ जाएगा और बाकायदा इसकी ब्रांडिंग की जाएगी।
जड़ी-बूटियों का प्रयोग : अन्य धान की तरह जैविक बासमती में कीटनाशक व हानिकारक रसायनों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। किसान इसमें जड़ी-बूटियों से तैयार मिश्रण का ही छिड़काव कर रहे हैं और फसल पर इसका फायदा भी दिख रहा है। चावल की गुणवत्ता की जांच अमेरिका की एक सर्टिफिकेशन एजेंसी वन सेट एशियन करेगी। जिन किसानों का चावल इस कंपनी के सभी मापदंडों पर खरा उतरेगा उसी किसान को सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
आम बासमती से बेहतर :
मोरारका के प्रोग्राम कोआर्डिनेटर अनिल कुमार के मुताबिक यह आम बासमती से बेहतर है। चावल के दाने का साइज बड़ा व चमकदार है और इसकी खुश्बू भी आम बासमती से भिन्न है। इसमें ज्यादा स्टार्च, मल्टी विटामिन्स, प्रोटीन व काबरेहाइड्रेट होते हैं। न्यूट्रिशियन गुंजन गुलाटी के मुताबिक जैविक तरीके से उगाई गई फसलें व सब्जियां ज्यादा पौष्टिक होती है और इसका स्वाद भी अच्छा होता है।