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International International लंदन
यदि जीनियस बनना चाहते हैं तो मशक्कत करने के लिए तैयार हो जाइए। मुश्किल उतनी भी नहीं है बस आपको जिस क्षेत्र में शिखर तक पहुंचना है उसके लिए 10 हजार घंटे निकालने होंगे।
डेली मेल में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मनी में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जीनियस एक फीसदी प्रेरणा और 99 फीसदी अभ्यास पर निर्भर करता है। यदि कोई 10 हजार घंटे तक अभ्यास करे तो चुने हुए क्षेत्र में शिखर को चूम सकता है।
दो से तीन घंटे तक रियाज किया
अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक मेधा और भाग्य भी महत्वपूर्ण है, लेकिन अभ्यास बेहतर और प्रतिभावान में अंतर पैदा करता है। बर्लिन की एकेडमी ऑफ म्यूजिक में अनुसंधानकर्ताओं ने वायलिन सीखने वाले छात्रों के एक समूह पर किए गए अध्ययन के बाद पाया कि जिन छात्रों ने पांच साल की उम्र में वायलिन बजाना शुरू किया और दो से तीन घंटे तक रियाज किया वे अन्य से बेहतर थे।
ऐसे छात्र 20 की उम्र होने के तक रियाज की अवधि बढ़ाते गए और वायलिन वादन में महारत हासिल कर ली। पाया गया कि महारती वादकों ने कुल 10 हजार घंटे तक रियाज किया, जबकि बेहतर छात्रों ने 8 हजार घंटे तक।
दिमागी अभ्यास
अध्ययन में शामिल एक अनुसंधानकर्ता डैनियल लेविटिन के हवाले से अखबार ने लिखा है, ‘इससे लगता है कि असली महारत हासिल करने के लिए दिमाग अभ्यास की अवधि में अपनी सभी जरूरतों के हिसाब से सब कुछ पचा लेता है।