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जालंधर.सलमा को हो गया ‘जुकाम’ और रुक गया है, जिला पुलिस की जांच का काम। सलमा को ‘जुकाम’ होने का मतलब यह नहीं कि वह बीमार है। वह पिछले 11 माह से सूंघ तो रही है, लेकिन बता कुछ नहीं रही। सलमा जालंधर पुलिस के डॉग स्क्वायड में शामिल है, जहां डेजी, स्टैफी, स्वीटी, रेशमा और नूरी (सभी फीमेल डाग्स) भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।
यह और बात है कि पिछले समय के दौरान इनकी सेवाओं का नतीजा शून्य ही निकला है। ऋता बावा हत्याकांड हो या कंप्यूटर गोदाम की 70 लाख की चोरी, जीपीओ की 40 लाख की डकैती अथवा कलां बाजार स्थित शिव ज्वैलर्स की 25 लाख की चोरी। बारी-बारी से सलमा, स्टैफी, स्वीटी, रेशमा मौके पर जाकर सूंघती हैं अपनी ‘स्टाफ बस’ में जा बैठती हैं।
जालंधर में डॉग स्क्वायड विभाग के पास छह फीमेल डाग्स हैं। बीते 11 माह के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो कई बड़ी वारदातें हुईं, मगर डॉग स्क्वायड टीम हर बार ही बैरंग लौटी। वहीं, पुलिस अधिकारी इस बारे अजीबो-गरीब तर्क दे रहे हैं।
पक्की सड़कें ही बनी बाधक:
जिला पुलिस अधिकारियों का अजीबोगरीब तर्क है कि सड़कें पक्की हो जाने की वजह से ‘सलमा’ सूंघने के बावजूद कुछ बता नहीं पा रही है। कच्ची जगहों पर तो डाग स्क्वायड के सदस्य ढूंढ निकालते हैं, लेकिन पक्की जगहों पर ढूंढ पाना मुश्किल हो जाता है।
नहीं करवाई जा रही रिहर्सल:
डाग स्क्वायड के मुलाजिम दावे कर रहे हैं कि स्क्वायड की फीमेल डाग्स को सप्ताह में दो बार रिहर्सल करवाई जाती है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। जानकारों के मुताबिक अगर दो बार रिहर्सल हो रही होती तो डॉग सफल होते। कई बार देखा गया है कि मुलाजिम डॉग को जबरदस्ती वारदात स्थल पर खींच रहे होते हैं।
तब आती है डॉग स्क्वायड: हत्या, डकैती और बड़ी चोरी जैसी सनसनीखेज वारदात करने वालों के निशान ढूंढ निकालने के लिए डॉग स्क्वायड की मदद ली जाती है। जालंधर में कुल छह कुतियां हैं। तीन ट्रैकर और तीन एक्सपलोसिव। ट्रैकर डॉग चोरी और हत्या के मौके पर जाते तो एक्सपलोसिव डॉग बम व नशीले पदार्थ के लिए जाते हैं। ट्रैकर डॉग आरोपी के पैरों के निशान और कपड़ा सूंघकर रास्ता बता देते हैं तो एक्सपलोसिव बम और पदार्थ को सूंघ कर ढूंढ निकालते हैं।
फिल्लौर से दी जाती है ट्रेनिंग:
6 व 8 माह की उम्र में ही डॉग्स को फिल्लौर स्थित ‘डॉग ब्रीडिंग कम ट्रेनिंग सैंटर’ में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। केवल उस डॉग को भेजा जाता है, जिसे वैटरनरी डॉक्टर ने फिट बताया हो। 1 साल तक उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है। उसके बाद डॉग स्क्वायड के पास भेज दिया जाता है। जालंधर पुलिस लाइन में डॉग स्क्वायड विभाग है। विभाग के इंचार्ज हरदेव सिंह हैं और उनकी टीम में छह मुलाजिम शामिल है।
सलमा की 1 दिन की खुराक
आटा/चावल 480 ग्राम
बिस्कुट 30 ग्राम
दूध 1.50 किलो
अंडे 2
सब्जियां 250 ग्राम
कोई सबूत न जुटाने का बड़ा कारण यह है कि वारदात स्थल पर आरोपी कोई निशान छोड़कर नहीं जाते हैं। न तो जूते की मिट्टी के निशान और न ही उनका कोई कपड़ा रह जाता है। कभी-कभार इनसे मदद मिल जाती है। गांवों में तो कुछेक वारदातें हल की गई हैं।
-धर्म सिंह उप्पल, डीएसपी हैडक्वार्टर।