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अजमेर. पांच साल पहले खुफिया पुलिस ने जिस बांग्लादेशी युवक को पकड़ कर सीमा पार भेजा था, वह कुछ ही दिन में अजमेर लौट आया था। सोमवार को दरगाह इलाके से जब दोबारा सीआईडी के हत्थे चढ़ा, तो उसने अपनी असलियत कबूल ली। हालांकि पहचान छुपाने के लिए पहले उसने मालदा, पश्चिम बंगाल से बने पहचान के तीन दस्तावेज पेश कर खुद को भारतीय बताने की कोशिश भी की। फिलहाल उसे दरगाह थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है। सीआईडी यह जांच कर रही है कि उसे फर्जी आईडी प्रमाण-पत्र कैसे प्राप्त हुए।
दूसरी बार.. जेल भेजा
सीआईडी के सब इंस्पेक्टर प्रकाश सिंह राठौड़ के हत्थे चढ़ा युवक नूर इस्लाम बांग्लादेश का मूल निवासी है। सोमवार को दरगाह इलाके में शक के आधार पर उसे पकड़ा था। पूछताछ में उसने बांग्लादेश का मूल निवासी होना कबूल कर लिया है। वह पहचान छिपाकर करीब चार साल से इलाके में रह रहा है। गौरतलब है कि नूर इस्लाम पांच साल पहले भी अवैध रूप से अजमेर में रहते पकड़ा गया था।
अंदरकोट स्थित चारयार कब्रिस्तान इलाके से रविवार को पकड़े गए बांग्लादेशी युवक मोहम्मद अशरफ शमीम को पुलिस ने अदालत के आदेश से जेल भेज दिया है। उसके बारे में बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ चौकी से तस्दीक रिपोर्ट मांगी जाएगी। शमीम बांग्लादेश के हली शहर मुंशीपाढ़ा चटगांव का मूल निवासी है। कई दिनों से वह खुद को बंगाली बताकर इलाके में रह रहा था। धारा 109 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है।