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छात्रों का आमरण अनशन

अजमेर. शिकायतों पर जांच रिपोर्ट मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नाराज भीलवाड़ा स्थित कंचनदेवी बीएड कॉलेज के छात्रों ने सोमवार को एमडीएस यूनिवर्सिटी के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया। कुलपति ने छात्रों को मंगलवार तक फैसला करने का आश्वासन दिया।

भीलवाड़ा के कंचनदेवी बीएड कॉलेज के कुछ छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर फीस व अन्य मामलों में मनमानी का विरोध करने पर परीक्षा में जान-बूझकर फेल करने का आरोप लगाया था। छात्रों की शिकायत के बाद तीन माह पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रो. सर्वेश पालरिया की अध्यक्षता में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था।

कमेटी ने डेढ़ माह पूर्व ही कॉलेज की जांच कर रिपोर्ट सौंप दी। कमेटी पाली व निवाई के बीएड कॉलेजों की भी जांच कर रही है। भीलवाड़ा के छात्रों ने कार्रवाई में देरी होते देख गत 19 नवंबर को कुलाधिपति, कुलपति के साथ ही कलेक्टर व एसपी को ज्ञापन देकर आमरण अनशन की चेतावनी दी थी।

सोमवार सुबह लगभग ग्यारह बजे छात्रों की आमरण अनशन की घोषणा के बाद कुलपति भागीरथ सिंह ने जांच समिति के अध्यक्ष प्रो. पालरिया, सदस्यों प्रो. शिवप्रसाद व दिग्विजय सिंह के साथ परीक्षा संचालक जगराम मीणा और डीन ऑफ कॉलेज प्रो. केके शर्मा को तलब किया। समिति की रिपोर्ट व तकनीकी पहलुओं की जांच में दोपहर हो गई तो छात्रों का प्रतिनिधि मंडल पुन: कुलपति से मिलने गया।

कुलपति प्रोफेसर भागीरथ सिंह ने उन्हें मंगलवार दोपहर तक छात्रों के हित में कार्रवाई का आश्वासन देते अनशन समाप्त करने का आग्रह किया लेकिन छात्रों ने फैसला होने पर ही अनशन समाप्त करने की घोषणा की। आमरण अनशन पर बैठे राजेश कोली, दयाशंकर खोईवाल, कैलाश खोईवाल, महेंद्र मीणा और ऋषिराज का कहना था कि तीन माह से केवल दिलासे दिए जा रहे हैं।

यह है पेच
यूृनिवर्सिटी प्रशासन भले ही आश्वासन दे रहा हो लेकिन हकीकत यह है कि यूनिवर्सिटी इस मामले में छात्रों की खास मदद करने की स्थिति में नहीं है। कॉलेज प्रशासन की मनमानी का विरोध करने वाले छात्रों की पहले छात्रवृत्ति रोकी गई, विरोध करने पर छात्रवृत्ति दे दी गई लेकिन आंतरिक परीक्षा में गैरहाजिर दर्शाकर रिजल्ट यूनिवर्सिटी को भेज दिया गया।

इस आधार पर यूनिवर्सिटी ने रिजल्ट घोषित कर दिए। उसके बाद जब छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर दबाव बनाया तब कॉलेज ने यूनिवर्सिटी से इजाजत लेकर आंतरिक परीक्षा के नवंबर अगस्त में भेजे लेकिन इस पर तारीख फरवरी माह की डाली। यहीं से कॉलेज शक के घेरे में आ गया। सूत्रों का कहना है कि बीएड परीक्षा हो चुकी है, रिजल्ट भी घोषित हो चुके हैं और फिर से रिजल्ट घोषित करने का कोई प्रावधान नहीं है।

पाली-निवाई की रिपोर्ट सौंपी
प्रो. पालरिया कमेटी ने पाली व निवाई के बीएड कॉलेजों की भी जांच रिपोर्ट सोमवार को कुलपति को सौंप दी। उल्लेखनीय है कि इन दोनों कॉलेजों के खिलाफ भी मनमानी वसूली का विरोध करने पर छात्रों को फेल कर देने की शिकायतें मिली थीं। रिपोर्ट के मामले में उच्चस्तरीय कमेटी की घोषणा बुधवार तक होने की संभावना है।





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