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बॉर्डर बेचान मामले की हवा निकली

अजमेर. सीमावर्ती क्षेत्र की हजारों बीघा जमीन बेचने को लेकर उठे बवाल की धीरे-धीरे हवा निकलती जा रही है। मामले से जुड़े चार सब रजिस्ट्रार के खिलाफ कोई गंभीर आरोप साबित नहीं हुआ है। वहीं दो आरोपी प्रमोशन पाकर आरएएस अफसर बन चुके हैं।

पिछले साल बॉर्डर बिकने के नाम पर इस मामले को इतना गंभीर बना दिया गया था कि इन जिलों के कलेक्टर तक बदल दिए गए थे। रेवेन्यू बोर्ड प्रशासन ने 4 सब रजिस्ट्रार को निलंबित कर कर 20 को चार्जशीट थमा दी थी। लंबे समय चली जांच के बाद इनमें से चार के खिलाफ किसी तरह के गंभीर आरोप साबित नहीं हुए हैं, रेवेन्यू बोर्ड प्रशासन ने जांच के बाद तीनों को केवल दस्तावेज पंजीयन में कुछ तकनीकी कमियां रखने पर आगे से ध्यान रखने की हिदायत देकर दोषमुक्त कर दिया है। मामले के जानकारों के अनुसार सभी आरोपी रजिस्ट्रार पर कमोबेश एक जैसे आरोप हैं।

इन्हें किया दोषमुक्त..
रेवेन्यू बोर्ड प्रशासन ने सांचौर के उप पंजीयक रहे रघुनाथसिंह राजपुरोहित, सेडवा के खेताराम, गड़रा रोड के प्रहलाद सिंह और सिणधरी के धन्नाराम भादू को दी गई चार्जशीट निरस्त करते हुए उन्हें भविष्य में तकनीकी बातों का ध्यान रखने की चेतावनी दी है।

दो की तरक्की
इस मामले में रेवेन्यू बोर्ड प्रशासन ने सांचौर के गणपतलाल चितारा और सिवाना के रामचंद्र पोटलिया को भी चार्जशीट दी थी। कुछ महीने पहले 70 तहसीलदारों को एडहॉक प्रमोशन देकर आरएएस अफसर बनाया गया था, जिनमें इन दोनों के नाम भी शामिल हैं। इन दोनों के खिलाफ आरोप होते हुए भी प्रमोशन कैसे मिला, इस बात का हालांकि रेवेन्यू बोर्ड प्रशासन की ओर से खुलासा नहीं किया गया है। चितारा ने भी माना कि उनके खिलाफ कुछ साबित नहीं हुआ और उनका प्रमोशन हो गया है।

नजर आ गए थे आसार
मामले की शुरुआती जांच में ही यह माना जा रहा था कि जमीन बेचान में कोई बहुत बड़ी गड़बड़ी नहीं हुई है और उप पंजीयकों ने केवल प्रक्रियात्मक मामूली गलतियां की हैं। यही वजह है कि पंजीयन महकमे ने 6 फरवरी को ही संबंधित खरीदार और विक्रेताओं को नोटिस जारी कर कमियां दूर करवा ली थीं। कुछ मामले बचे हैं, जिनमें भी या तो कमियां दूर करने की कोशिश की जा रही है या बेचाननामे निरस्त कराने के लिए कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। इससे पहले पंजीयन महकमे ने पिछले साल 26 दिसंबर को नोटिफिकेशन जारी कर निर्देश दिए थे कि दस्तावेज रजिस्टर्ड करते समय क्रेता-विक्रेता के फोटो और फिंगरप्रिंट लिए जाएं।

ऑर्डर जारी..
इस मामले में बोर्ड प्रशासन ने ऑर्डर तो जारी किए हैं, लेकिन डिटेल ऑर्डर व प्रोसिडिंग्स ऑफिस का रिकॉर्ड देखकर ही कुछ बता सकती हूं।
-कुशलसिंह, अध्यक्ष, रेवेन्यू बोर्ड





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