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सोलंग गांव (मनाली).
मनाली से 20 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में मंगलवार दोपहर तीन बजे लगी भीषण आग में काठकूणी शैली के 30 मकान राख हो गए। इस शैली के गांव में 50 मकान थे। ज्यादातर लोगों को घरों से सामान तक बाहर निकालने का मौका नहीं मिला।
कुछ लोग बड़ी मुश्किल से कुछ करीब 40 परिवार बेघर हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
देखते-देखते राख हो गए आशियाने :
सभी मकान ढाई से तीन मंजिला काठकूणी शैली के थे। लोगों ने घरों में मवेशियों के लिए घास एकत्र कर रखी थी। घास के ढेर में आग लगने से पूरा गांव चपेट में आ गया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग के कर्मचारी, हिम आवधाव अध्ययन केंद्र, ग्रैफ, पैरा ग्लाइडिंग एसोसिएशन, हिमाचल विद्युत प्रोजेक्ट, पर्वतारोहण संस्थान और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।
तिरपाल और कंबल बांटे :
एडीएम आरके परूथी ने बताया कि प्रभावितों को 50 तिरपालें और 200 कंबल दिए गए हैं। अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं खेल संस्थान मनाली में प्रभावितों के ठहरने व खाने-पीने का इंतजाम किया गया है। प्रभावितों की सही सूची का पता नहीं लग पाया है।
विधायक गोविंद ठाकुर ने संवेदना जताते हुए कहा है कि प्रभावितों को हर संभव मदद दी जाएगी। उधर, समाचार लिखे जाने तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका था।सोलंग गांव जाने के लिए सड़क नहीं है। अगर यहां सड़क की सुविधा होती तो हो सकता है कि दमकल विभाग के कर्मचारी जल्द पहुंच जाते। सोलंग गांव पहुंचने के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर की सीधी चढ़ाई तय करनी पड़ती है। गांव में पानी का इंतजाम भी नहीं है। इस वजह से लोगों ने मिट्टी डालकर आग बुझाने की कोशिश की।