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नई दिल्ली.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने कहा है कि मौजूदा वित्तीय संकट के कारण दुनियाभर में करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के वेतन में भारी कटौती देखने को मिल सकती है। खाद्य पदार्थों व ऊर्जा की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के चलते संकट का सर्वाधिक असर निचली आय वर्ग पर पड़ेगा। लेकिन, मध्यम वर्ग को भी इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
मंगलवार को जारी आईएलओ की ‘ग्लोबल वेज रिपोर्ट क्क्८-क्९’ में इस बात का उल्लेख है। रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि दुनिया के तमाम देशों में वेतन के मोर्चे पर तनाव की स्थिति बन सकती है।
आईएलओ महासचिव जनरल जुआन सोमाविया ने इस मौके पर कहा कि धीमी व नकारात्मक विकास दर तथा खाद्य पदार्थो व ऊर्जा के मूल्यों में तेज उतार-चढ़ाव के कारण कई कर्मचारियों के वास्तविक वेतन में गिरावट आएगी। इसमें ज्यादातर कम वेतन पाने वाले या गरीब परिवार शामिल होंगे।
ज्यादातर देशों में घटेगा वेतन
आईएलओ ने आईएमएफ के आंकड़ों के आधार पर कहा है,
>> वर्ष 2009 में दुनिया में वास्तविक वेतन (रियल वेज) की सर्वाधिक वृद्धि दर 1.1फीसदी रहने का अनुमान है। >> वर्ष 2008 में यह 1.7 फीसदी रहेगी।>> ज्यादातर देशों में वेतन के स्तर में गिरावट दर्ज की जाएगी। >> औद्योगिक देशों में यह दर 2008 में 2.8 फीसदी की तुलना में वर्ष 2009 में -0.5 फीसदी रहने का अनुमान है।
क्या है रियल वेज?
रियल वेज से तात्पर्य किसी व्यक्ति, संस्थान या देश की उस आमदनी से होता है, जिसे क्रय शक्ति पर मुद्रास्फीति की दर के असर को ध्यान में रखकर निकाला जाता है।
1.5 अरब लोगों पर संकट :
‘दुनिया के १.५ अरब वेतनभोगियों के लिए आने वाला दौर बेहद मुश्किल है।’
-जुआन सोमाविया, महासचिव, आईएलओ