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सांपला (रोहतक) .
जिंदगी के वह 64 दिन मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। हर रोज मौत को काफी करीब से देखा है। मेरे सकुशल घर पहुंचने के पीछे मेरे घरवालों और करोड़ों देशवासियों की दुआएं हैं। यह कहना है खरावड़ के बिजेंद्र का।
सोमालियाई जलदस्युओं की कैद में 64 दिन बिताने के बाद मालवाहक जहाज एवी स्टोल्ट वेलोर पर तैनात बिजेंद्र मंगलवार को घर पहुंचा। परिजन उसे लेने दिल्ली एयरपोर्ट गए थे जहां उसका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
बिजेंद्र ने कहा कि 15 सितंबर को मुंबई पहुंचने से चार दिन पहले ही डाकुओं ने जहाज को अगवा कर लिया। इसके बाद हर दिन तनाव में बीता। उन्हें डराने के लिए डाकू उन्हें खड़े कर साइड से गोलियों की बौछार शुरू कर देते थे। वे खुद मुश्किल में थे लेकिन घरवालों को फोन पर हमेशा सांत्वना देने की कोशिश करते थे। हर पल घर की याद सताती रहती थी।
बिजेंद्र ने बताया कि फिरौती की रकम मिलने के बाद जहाज को रिहा करने के मुद्दे पर डाकुओं में झगड़ा हो गया था। जहाज पर मौजूद 22 से ज्यादा डाकुओं में दो गुट बन गए और एक दिन तो उनमें जमकर गोलीबारी हुई जिसमें एक डाकू मारा गया। उस समय सबके मन में यह डर था कि कहीं ये लोग जहाज डुबो न दें।