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री-पोलिंग में भी फर्जी मतदान

रायपुर. कोंटा विधानसभा क्षेत्र के गोगुंडा मतदान केंद्र में कल पुनर्मतदान में भी फर्जी वोट डाले गए। चुनाव आयोग को जानकारी मिली है कि मतदान दल गोगुंडा तक पहुंचा ही नहीं। मतदान केंद्र से काफी दूर बैठकर ही दल के सदस्यों ने ही वोट डाल दिए।

फर्जी मतदान की शिकायतें सहीं पाई गई हैं। आयोग ने गोगुंडा में फिर एक बार पुनर्मतदान करने का फैसला लिया है। केशकाल के छाखरी, भोंगापाल और कसइफरसगांव में भी इसी तरह फर्जी मतदान किया गया। नारायणपुर विधानसभा के कुंडा मतदान केंद्र में भी मतदान दल पुनर्मतदान के लिए नहीं पहुंचा। इन स्थानों पर एक ही दिन पुनर्मतदान होगा। आयोग ने माना है कि नक्सली खौफ के कारण मतदान दल बूथ तक नहीं जा रहा है।

मानिकचौरी में 87 फीसदी वोटिंग
रायपुर. दूसरे चरण के मतदान के दौरान गड़बड़ियों की वजह से सात विधानसभा क्षेत्रों के 16 मतदान केंद्रों में मंगलवार को पुनर्मतदान हुआ। अभनपुर के मानिकचौरी में सबसे अधिक 87 फीसदी वोट पड़े। वहीं पौता में 80 फीसदी मतदान की खबर है। यहां वोट देने रात तक लाइन लगी रही।

सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अरविंद दीक्षित के मुताबिक कड़ी सुरक्षा के बीच इन केंद्रों में लोगों ने वोट डाले। मोहला मानपुर में दोपहर 2 बजे तक सिर्फ 16 फीसदी लोगों ने ही वोट डाले थे, लेकिन उसके बाद जमकर मतदान हुआ। यहां 54 फीसदी मतदान हुआ।

दोर्दे में 60 और चुनर में 48 फीसदी वोट पड़े। शाम 7 बजे तक अधिकांश केंद्रों की फाइनल रिपोर्ट आयोग को नहीं मिली थी। भटगांव में 63 फीसदी वोट पड़े। यहां कुबेरपुर में 65 प्रतिशत और सपहा में 50 फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया। दोपहर 3 बजे तक पत्थलगांव में 68, कटघोरा में 64, बिलाईगढ़ में 62 और कसडोल में 56 फीसदी मतदान हो चुका था। बिलाईगढ़ के जोगीडीपा में 63, तिलाईपाली में 65, देवरी में 68 और देवरूंग में 82 फीसदी वोटिंग की खबर है। कसडोल के भरदा में 65, खमरिया में 64 प्रतिशत वोट पड़े।

सात मतदान कर्मियों पर गिरेगी गाज
दंतेवाड़ा. कोंटा विधानसभा के गोगुंडा केंद्र में पुनर्मतदान के दौरान कथित फर्जी मतदान की जांच शुरू हो गई है। संबंधित कर्मियों पर गाज गिरने की संभावना है। मामले की जांच कर रहे बस्तर कमिश्नर आरएस विश्वकर्मा ने आज मतदान दल के सदस्यों, सेक्टर आफिसर एमएस ध्रुव, माइक्रो आब्जर्वर राजकुमार महोबिया, पीठासीन अधिकारी शिवलाल नेताम, मतदान अधिकारी संतोष सोनवाने, दिलीप कुमार मरकाम और नूपो देवा, पथ प्रदर्शक हीरालाल ध्रुव समेत वीडियो ग्राफर भुनेश मंडावी, सीआरपीएफ 55वीं बटालियन के कंपनी कमांडर हरिसिंह, एसपी राहुल शर्मा, कलेक्टर एसपी सोरी और कोंटा के रिटर्निग आफिसर रजत कुमार के बयान लिए।

मतदान दल के लोगों ने स्वीकार कर लिया कि नक्सलियों के भय से वे गोगुंडा नहीं पहुंचे, रास्ते में ही सामसेट्टी की एक झोपड़ी में प्रमुख राजनीतिक दलों के एजेंटों की सहमति से मतों का बंटवारा कर फर्जी तरीके से 185 मत डाल दिए। राजनीतिक दलों के एजेंटों ने मतदान को लेकर अपने अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए हैं।

गोगुंडा गांव में कुल 6 पारा हैं। इनमें पांच पारा पहाड़ियों पर है और एक नीचे है। पहाड़ियों के नीचे स्थित सरपंच पारा के थानागुड़ी में मतदान केंद्र बनाया गया था। मतदान दल की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की दो प्लाटून समेत डीएफ और सीएफ के जवान जिनकी संख्या करीब 100 थी, तैनात थे। कांेटा के रिटर्निग आफिसर रजत कुमार ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर प्रत्याशियों की बैठक ली थी जिसमें प्रत्याशियों ने किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई। दंतेवाड़ा कलेक्टर एसपी सोरी के मुताबिक मामले की जांच में फर्जी मतदान की पुष्टि हो गई है और मतदान कर्मी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं।





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