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चंदेरी की साड़ी और भोपाल का कुर्ता

बिलासपुर. art मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति व परंपरागत कला से शहरवासियों को रू-ब-रू कराने और वहां के प्रतिभावान कलाकारों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के उदे्श्य से इसका आयोजन किया गया है। जिसमें मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे 60 से ज्यादा कलाकारों ने स्टाल लगाए हैं। प्रदर्शनी 2 दिसंबर तक चलेगी।

प्रदर्शनी मे कलाकारों की उच्चस्तर का हस्तशिल्प झलकता है। जिसके लिए उन्हें सरकार ने समय समय पर पुरस्कार व सम्मान से नवाजा है। मृगनयनी के प्रबंधक एमएल शर्मा कहते हैं कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के हस्तशिल्प की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मांग है। लेकिन पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण कलाकार और कलाप्रेमी दोनों के बीच दूरियां बनी हुई है। प्रदर्शनी का उद्देश्य व्यापार नहीं बल्कि प्रतिभावान कलाकारों को मंच प्रदान करना है।

70 किलो का ऐरावत
टीकमगढ़ का हस्तशिल्प विश्व प्रसिद्ध है, यहां पीतल में चार धातुओं के समिश्रण से मूर्तियां एवं शिल्प तैयार किए जाते हंै। यहां लगी प्रदर्शनी मंे पीतल से बने सजावट के समान घड़ी, लैम्प, बैल गाड़ी, सूर्यमुखी ताला, 70-70 किलो वजनी ऐरावत व स्वागत मूर्तियों के अलावा धार्मिक मान्यता एवं विश्वास से जुड़े अनेक आकर्षण है। श्रीराम दरबार, लक्ष्मी-गणोश-सरस्वती की प्रतिमाओं के साथ भगवान विष्णु के सभी अवतारों को प्रदर्शित करने वाली प्रतिमा व पेड़ के नीचे बंशी बजाते भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी मुद्रा लोगांे को आकषिर्त कर रही हैं। मेटल वर्क पर जौहर दिखाने वाले रामस्वरूप सोनी को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

चार चांद लगाने वाली चंदेरी साड़ी
अशोक नगर मध्यप्रदेश स्थित तहसील चंदेरी, साड़ियों के लिए जानी जाती है। प्रदर्शनी मंे चंदेरी साड़ियों की वैराइटी महिलाओं व युवतियों को लुभा रहीं है। ये साड़ियां लगभग 90 दिनों तक दो कलाकारों के नियमित मेहनत से तैयार होती है।

नाल फेरमा डिजाइन, अशर्फी बूटी, बारीकी से बनाए गए हाथ और उस पर मेहंदी व गंगा जमुना बार्डर आदि चंदेरी साड़ियों की विशेषता है। कलाकार बताते हैं कि चंदेरी का जलवायु और धागा साड़ियों के महत्व को बढ़ाता है। रीयल जरी पर दूधिया संगमरमर, चटख नीला-नारंगी और विविध रंग की साड़ियां प्रदर्शनी मंे अपनी खास पहचान बनाए हुए है। चंदेरी साड़ियों में हुनरमंद पृथ्वीराज कोली को मध्यप्रदेश शासन ने सम्मानित किया है।

महिलाओं को भाया रजवाणी लुक
फिल्म ‘जोधा अकबर’ के बाद टीवी सीरियल ‘बालिका वधु’ ने एक बार फिर ज्वैलरी के फैशन को बदल दिया है। प्रदर्शनी में लगी एथनिक लुक वाली थेवा आर्ट की ज्वैलरी महिलाओं को लुभा रही है। प्रदर्शनी के प्रबंधक एमएल शर्मा बताते हैं कि थेवा आर्ट मूलत: राजस्थानी कला है। इसके गिने चुने कलाकार मध्य प्रदेश व राजस्थान से सीमावर्ती क्षेत्रों में ही मिलते है। प्रदर्शनी मंे इन कलाकरों के ही शिल्प रखे गए है। वे बताते है कि थेवा आर्ट के कलाकरों को बंद अंधेरे कमरे में एक हार तैयार करने में लगभग पंद्रह दिनों का समय लगता है। थेवा ज्वेलरी बेल्जियम ग्लास पर 24 कैरेट सोने पर ही तैयारी जा सकती है।

आर्गेनिक चादर, साड़ी व कुर्ते
हर्बल प्रोडक्ट की बढ़ रही चलन के बीच आर्गेनिक कपड़ों की अपनी डिमांड है। आर्गेनिक कपड़े केचुएं की खाद पर उगे कपास को कातकर बनाए गए धागों से बनाए जाते हैं। धागों की बुनाई करके हर्बल कलर डाला जाता है। प्रदर्शनी में लगी सिंगल बैड, बडल बैड की चादरों को हैण्ड विविंग करके तैयार किया गया है। यहां लाई गई एण्टी एलजिक चादरों की एक खासियत यह भी है कि इनके रिकल बिस्तर को और भी सुखदाई बनाते हैं। नरम धागांे की ये चादरे खूबसूरत और हर मौसम के अनुकूल है। यहां विविध रंगों में आर्गेनिक साड़ी और कुर्ते भी प्रदर्शित किए गए है।

लाख व लकड़ी पर अनोखी कलाकारी
मृगनयनी के हर स्टाल में कलाकारों का उच्चस्तरीय हस्तशिल्प झलकता है। मध्यप्रदेश के हुनरमंद कलाकारों ने यहां लाख एवं लकड़ी पर भी अपने बेजोड़ हुनर का प्रदर्शन किया है। श्रृंगार में खास महत्व रखने वाली चुड़ी और हार पर लाख से की गई कलाकारी महिलाओं और युवतियों को आकषिर्त कर रही हैं वहीं लाख से बनी पेन, बाल पीन, आइना जैसे अन्य वस्तु भी आकषर्ण का केंद्र है। इसी तरह प्रदर्शनी मंे लगाई गई सहारनपुर की काष्ठकला लोगांे द्वारा पसंद की जा रही है।

सुंदर लिखाई का प्रशिक्षण
प्रदर्शनी का एक खास आकषर्ण यहां लगी सुंदर लिखाई प्रशिक्षण स्टाल है। प्रशिक्षक जितेंद्र प्रजापति बताते हंै कि प्रशिक्षण उपरांत किसी भी व्यक्ति की लिखाई बिल्कुल कंप्यूटर प्रिटिंग जैसी हो जाती है। यहां एक ही पेन से मल्दी कलर राइटिंग द्वारा लेखन को नया अंदाज दिया जा सकता है।





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