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.. तो यात्रियों को नहीं भटकना पड़ता

शिवपुरी. प्रदेश समेत जिले में सभी निजी और सड़क परिवहन निगम से अनुबंधित बसें चुनाव के लिए अधिग्रहित कर लेने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को होने वाली परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो यात्री जहां है उसकी यात्रा वहीं थम गई या फि र ट्रकों से जाना पड़ा। वाहनों की कमी के चलते कई मतदाता मतदान करने से भी वंचित रह जाएंगे।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग के निर्देश पर प्रदेश में कुल 16 हजार छोटी-बड़ी बसों में से छह हजार बसें चुनाव कार्य के लिए अधिग्रहित कर ली गई है। इनमें कई ऐसी बसों को भी पकड़ लिया गया है जो कि अंतरराज्यीय रूट की हैं। इस कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे हालात कुछ घंटों के लिए नहीं बल्कि पूरे 28 नवंबर तक के लिए बन गए हैं। क्योंकि मतदान के बाद यह बसें मतदान दलों को वापस करके ही यात्रियों के लिए चल सकेंगी।

एक दिन देरी से ही हो सकेगा यातायात सामान्य
मप्र सड़क परिवहन निगम कर्मचारी उत्थान समिति के प्रदेश सचिव श्याम सुदर शर्मा का कहना है कि चुनाव के दौरान अंतरराज्यीय बसों को भी पकड़ लिया है। इस कारण बसों को दूसरे संभागों में भी रोक लिया है। यात्रियों को इससे यह परेशानी होगी कि 27 नवंबर को मतदान के बाद अधिग्रहित बसें पहले तो मतदान दलों को वापस उनके शहर छोड़ेगी, इसके बाद वह अपने रूट पर वापस जाएगी। इस काम में अतिरिक्त समय लगेगा। तब कहीं जाकर उस रूट पर यातायात सामान्य दशा में पहुंच सकेगा।

परिवहन विभाग के अधिकारी जिम्मेदार
विधानसभा चुनाव में यह पहली बार हुआ है, जब बड़ी संख्या में निजी और अनुबंधित बसें पकड़ी गई हैं। इसकी वजह सपनि के खत्म होने के कारण सरकारी बसों की कमी महसूस की जा रही है और कहीं से भी बसों, जीपों और अन्य वाहनों को पकड़ लिया है।

बस आपरेटरों का कहना है कि अगर प्रदेश और जिले का परिवहन विभाग, पहले से ही योजना बनाकर बस आपरेटरों को भरोसे में लेकर काम करते तो जिस जिले की बसें हैं वहीं के लिए वह उपयोग की जाती और यातायात जल्दी ही सामान्य हो जाता। इसके अलावा आपरेटरों के आपसी सहयोग से गिनी -चुनी बसें ही चुनकर ली जातीं।





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