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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. पिछली विफलताओं से सबक लेकर पुलिस के आधुनिकीकरण की कवायद शुरू कर दी गई है। रायपुर जिले के सभी 43 थानों को ऐसे बलवा निरोधक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे न केवल फोर्स अपना बचाव कर पाएगी बल्कि दंगाइयों पर प्रभावी तरीके से काबू पाया जा सकेगा। कई नागपाश जैसे अत्याधुनिक उपकरण पहली बार पुलिस को मिले हैं।
विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान पुलिस को सुसज्जित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। थानों के 40 प्रतिशत स्टाफ के लिए बलवा निरोधक संसाधनों का वितरण कर दिया गया। इस लिहाज से हर थाने में औसतन 15 सैट उपलब्ध कराए गए हैं। अफसरों का कहना है कि बाकी सप्लाई जरूरत पड़ने पर की जा सकती है। पुलिस लाइन में इसका रिजर्व कोटा है। इसकी संख्या ढाई से तीन सौ तक है। चुनाव के दौरान संसाधनों से लैस फोर्स से रिहर्सल कराई गई। वह पहले की अपेक्षा ज्यादा सक्षम साबित हुई।
थानों में इन्हें ऐसी जगह रखने के निर्देश दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर इन्हें खोजना न पड़े और चंद मिनटों में फोर्स लैस होकर मौके पर पहुंच सके। पहली बार जवानों को विशेष पैड दिए गए हैं। क्रिकेटर की तरह जवान पैर और हाथों में लगाकर पथराव और लाठी से आत्मरक्षा कर सकेंगे।
फोम से तैयार इन पैड्स को सिंग और एल्बो गार्ड कहते हैं। भीड़ में पथराव से बचाव के लिए पुलिस अब तक बांस की परंपरागत सील्ड का इस्तेमाल करती थी। इसे पूरी तरह रीप्लेस कर फाइबर की पारदर्शी सील्ड दी गई है। यह अपेक्षाकृत हल्की होने के साथ-साथ मजबूत भी है। बांस की सील्ड के इस्तेमाल में छोटे पत्थरों से जख्मी होने का खतरा बना रहता था। इसके पारदर्शी नहीं होने से बचाव के वक्त सामने का कुछ दिखाई नहीं देने से भीड़ को नियंत्रित करने में मुश्किल पेश आती थी। फाइबर की प्लेट पहले की तुलना में कांपेक्ट साइज के हैं। इसी प्रकार 500 से ज्यादा नए हेलमेट थानों को दिए गए हैं। ये फाइबर के हैं।
क्या है, नागपाश
नागपाश टियर गैस का नया गोला है, जो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आतिशबाजी की तरह इस्तेमाल किया जाता है। यह धमाके के साथ 40-50 मीटर ऊंचाई पर जाने के बाद दो टुकड़ों में विभाजित होता है। इसके टुकड़े इतने पावरफुल होते हैं कि भीड़ को जल्द ही तितर बितर होने के लिए मजबूर कर देते हैं। इनके अलावा थानों को टियर गैस गन, थ्री वे ग्रेनेड और स्टन ग्रेनेड भी उपलब्ध कराए गए हैं। गौरतलब है कि तीन-चार महीने पहले भीड़ पर फेंके गए गोले बेसर साबित हुए थे। टियर गैस गन दो अलग-अलग रेंज की होती हैं। शार्ट रेंज की मारक क्षमता 50 मीटर और लांग रेंज की 100 मीटर तक होती है। थ्री वे ग्रेनेड को छोड़ते वह तत्काल तीन टुकड़ों में विभाजित होकर बिखर जाता है। इससे भीड़ के बड़े हिस्से को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
लंबे समय तक रहता है असर
जानकार पुलिस अफसरों के मुताबिक टियर गैस का धुंआ इतना प्रभावी होता है कि चार से छह घंटे तक आंखों में जलन रहती है। इससे प्रभावित व्यक्ति को कई बार उल्टियां तक होने लगती हैं। आधुनिक टियर गैस की बड़ी विशेषता यह भी है कि इसका धमाके के साथ धुंआ उठता दिखाता है, लेकिन थोड़ी देर में इसके अदृश्य होने के बावजूद यह असर डालता रहता है।
दंगा निरोधक गाड़ी
‘आरआईवी’ के नाम से दंगा निरोधक गाड़ी पुलिस को दी गई है। इस वाहन के जरिए दंगा जैसी परिस्थिति में दो-तीन दिनों तक खुद को सुरक्षित रखते हुए बलवाइयों से निपटा जा सकता है। मजबूत जाली के घेरे से सुरक्षित यह वाहन सायरन, टियर गैस समेत बलवा निरोधक तमाम उपकरणों से लैस है। इसमें आधा दर्जन पुलिस वालों के बैठने के अलावा खाने-पीने की व्यवस्था रहती है। फिलहाल यह वाहन क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है।