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पहली बार चुनी सरकार

इंदौर. vote अब तक बड़ों को देश पर चर्चा करते सुना, होश संभालते ही मीडिया में गरमागरम राजनीतिक बहस पढ़ी-देखी लेकिन कभी खुद इसे महसूस नहीं कर पाए। वह दिन आया जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकें। 27 नवंबर का जिस बेसब्री से इंतजार था, उसकी कोई और कल्पना भी नहीं कर सकता। वोट देने के बाद लगा जैसे कोई बड़ा फर्ज निभाया हो।

यह कहना है शहर के उन युवा वोटर्स का जिन्होंने गुरुवार को पहली बार मतदान किया। इसके लिए उन्होंने खासी तैयारी की थी। सुखलिया के दीपक शर्मा कहते हैं दो दिन से मम्मी-पापा से पूरी प्रोसेस समझने की कोशिश कर रहा था। कैसे वोटर नंबर जानकर अंदर जाना है, कहां दस्तखत करना होंगे और कैसे वोट देना पड़ेगा।

श्रीनगर निवासी अंकित परमार बताते हैं लाइन में लगा तो पहले मतदान की खुशी के साथ थोड़ा अजीब सा लग रहा था। डर लगा रहा था कहीं कोई गड़बड़ न कर दूं। आगे खड़ी एक आंटी को जब बिना आईडी प्रफू के कारण बिना वोट दिए लौटाया गया तो मैं और सहम गया। नेहा पुरोहित कहती है ईवीएम देखकर तो मैं उलझन में पड़ गई। सभी नाम पढ़कर फिर सोचने लगी कि किसको वोट देना चाहिए। खैर वोट देकर बाहर निकली तो लगा कोई बड़ा काम कर दिया है।

परखकर दिया पहला वोट
जय वैद्य के पास जब छह महीने पहले वोटर आईडी कार्ड आया तबसे उन्हें वोटिंग की तारीख का इंतजार था। पार्टियों द्वारा उम्मीदवार तय करने के बाद से ही वे उन पर विचार कर रहे थे कि किसे और क्यों वोट दें। उन्होंने अपना वोट विकास और बेहतर एजुकेशन के लिए दिया। क्षेत्र क्रमांक पांच के लिए वोट डालने वाली राशिता द्विवेदी ने बताया मैं अपने वोट से शहर में आईटी से संबंधित रोजगार बढ़ने की उम्मीद करती हूं। जय वैद्य ने कहा बचपन से बड़ों के साथ वोट डालने की जिद करता था। आज मैंने अपना यह पहला वोट प्रदेश के बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए दिया है।

विकास चाहिए, तनाव नहीं
ज्योत्सना डामोर ने पहली बार क्षेत्र क्रमांक दो के लिए वोट डाला। उन्होंने कहा मेरा वोट ऐसी सरकार के लिए है जो विकास तो करे पर साम्प्रदायिक तनाव कम करे। पांच नंबर सीट के लिए वोट करने वाली सपना सुगंधी ने बताया मुझे अपने पहले वोट का अलग एक्साइटमेंट था। मैं ऐसी सरकार चाहूंगी, जो सुरक्षा के साथ बढ़ती महंगाई पर काबू कर सके।

पूरे समय परेशान किया
श्वेता तिवारी और उनकी बहन शालिनी कहती हैं हम सुबह से ही मतदान केन्द्र पहुंच गए थे। हालांकि लाइन कम थी पर जितनी देर तक हम लाइन में लगे, पूरे समय हमने सामने वाली आंटी और अन्य को अलग-अलग प्रश्न पूछकर परेशान कर दिया। गुमाश्तानगर में रहने वाली बरखा अजमेरा कहती हैं हम तीन भाई-बहन ने पहली बार वोट दिया। आईआईपीएस स्टूडेंट नेहा राय कहती हैं भाई मयंक वोटिंग के लिए बहुत क्रेजी हो रहा था। पिछले कई दिनों से उसने घर में सभी की नाक में दम कर रखा था।

अब उनकी बारी है
श्रीनगर की पूजा जामवत व कीर्ति द्विवेदी कहती हैं हमने वोट देकर अपना फर्ज निभा दिया है। अब जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि वे अपनी भूमिका अच्छे से निभाए। हालांकि अब हम पांच साल का इंतजार नहीं करेंगे। यदि कोई जनप्रतिनिधि ठीक से काम नहीं करेगा तो उस पर हर तरह से दबाव बनाकर फर्ज निभाने के लिए बाध्य करने की कोशिश करेंगे।

इसलिए दिए वोट
मतदान को लेकर युवाओं के अपने इश्यू थे। हर कोई एक सपना लेकर पोलिंग बूथ तक गया कि उसका वोट क्या असर दिखाएगा। अब वे चाहते हैं नई सरकार उनकी अपेक्षाओं पर खरी उतरे। सिटी भास्कर ने जाना कौन से मुद्दे थे जो पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को पोलिंग बूथ तक लेकर गए।

>> शहर के अंदरूनी हिस्सों का भी विकास हो।
>> बेहतर एजुकेशन।
>> स्कूल-कॉलेजों में आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर।
>> स्पोट्र्स की सुविधाएं।
>> आईटी सहित सभी क्षेत्र में रोजगार।
>> सांप्रदायिक सद्भाव।
>> सुदृढ़ सुरक्षा-व्यवस्था।
>> अच्छी व सर्वसुलभ स्वास्थ्य सेवाएं।
>> महंगाई पर नियंत्रण।
>> कला-संस्कृति व साहित्य को प्रोत्साहन।





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