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जीवन में आघातों से ऊपर उठना सीखें

विकास मंत्र. आज ऐसे बहुत से लोग हैं, जो हीन भावना से ग्रस्त हैं। हमारे समाज में कई तत्व हैं, जो इसमें योगदान देते हैं। बहुत ज्यादा लोग इन तत्वों का प्रयोग बहानों के रूप में करते हैं कि वे वह नहीं है, जो वे हो सकते थे। परंतु कुछ लोग उन आघातों से ऊपर उठना सीख लेते हैं, जो जीवन ने उन्हें दिए हैं। उन्होंने जान लिया है कि चाहे दूसरे कुछ भी कहते हों या उनके साथ कैसा भी व्यवहार करते हों, वे कुछ खास हैं।

मैं एक महिला के बारे में बताना चाहता हूं। यह बाईस वर्षीय तलाकशुदा महिला दो बच्चों के साथ थी और बहुत गरीब भी। उसके पास जो गिने-चुने डॉलर थे, उनसे उसने कैलिफोर्निया का बस का टिकट खरीदा। उसे विश्वास था कि वहां उसे काम मिल जाएगा। उसे काम मिल भी गया। हालांकि यह मुश्किल काम था क्योंकि उसे आधी रात से सुबह छह बजे तक टैको नामक एक खाद्य सामग्री बनाने का काम मिला था।

वह सिर्फ कुछ डॉलर कमा पाती थी, परंतु वह संयम से रहती थी और अपने कमाए हुए हर डॉलर में से कुछ न कुछ बचा लेती थी। वह क्यों बचाती थी? इसलिए क्योंकि वह एक सपने की तस्वीर देख रही थी- वह टैको शॉप की मालिक बनना चाहती थी। एक दिन वह अपने बचाए हुए डॉलर लेकर एक बैंकर के पास गई और कहा, ‘मैं एक छोटी-सी दुकान खरीदना चाहूंगी। अगर आप मुझे कुछ हजार डॉलर का लोन दे दें, तो मैं अपनी खुद की शॉप खोल सकती हूं।’

बैंकर ने उससे प्रभावित होकर उसे कर्ज देने का फैसला किया। पचीस साल की उम्र में वह छोटी सी शॉप की मालिक बन गई। उसने इसमें कड़ी मेहनत की और वह अपना बिजनेस बढ़ाती गई, बढ़ाती गई और अंतत: कुछ वर्र्षो बाद वह उस प्रॉडक्ट के सबसे बड़े होलसेल बिजनेस की मालिक बनी।





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