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आतंक के खिलाफ बने सख्त कानून

नई दिल्ली/मुंबई . देश के उद्योग जगत ने मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद केंद्र से आतंकवाद को निपटने के लिए मजबूत नेतृत्व के साथ सख्त कानून बनाने की मांग की है। उद्योग चैंबरों के प्रमुखों सहित उद्योग जगत के नेताओं ने एक स्वर में पुरजोर अपील में कहा है कि देश के संस्थान आतंकवादी हमलों के कारण प्रभावित हो रहे हैं और इसलिए देश को हाई अलर्ट पर रहने की जरूरत है।

एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने मुंबई हमले की तीव्र भत्र्सना करते हुए कहा कि ऐसे धमाके देश के घरेलू एवं विदेशी निवेशकों के विश्वास पर गहरा असर करते हैं।

केंद्र से मांगा मजबूत नेतृत्व: आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कानून की वकालत करते हुए फिक्की के अध्यक्ष राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि यह ऐसा समय है, जब हम मिलकर आतंकवाद के खिलाफ बहस छेड़ें और केंद्र से बेहतर कानून के साथ ही मजबूत नेतृत्व की मांग करें।

व्यापारिक संस्थान होते हैं प्रभावित:

सीआईआई के प्रेसीडैंट तथा आईसीआईसीआई बैंक के सीईओ केवी कामत ने कहा कि आर्थिक राजधानी मुंबई पर हुए हमले से यह साबित होता है कि हमारे संस्थान चाहे वह होटल हों या दूसरे व्यापारिक संस्थान, प्रभावित हो सकते हैं।

आईटी कंपनियों ने सुरक्षा बढ़ाई:

आतंकवादी हमले के टार्गेट में आई देश की आईटी कंपनियों ने देश के विभिन्न इलाकों में अपने कै म्पस पर सुरक्षा बढ़ा दी है, जबकि मुंबई में कई कंपनियों ने अपने संस्थान बंद कर दिए हैं। देश की सर्वोच्च सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टीसीएस हाउस जोकि छत्रपति शिवाजी टर्मिनल के पास स्थित है, और आतंकवादियों के टार्गेट में से एक है, को बंद कर दिया है। दक्षिणी मुंबई में काम करने वाले कर्मचारियों ने उत्तरी मुंबई से इस दफ्तर का कारोबार देखना शुरू किया है। हालांकि इन्फोसिस का मुंबई में कैम्पस नहीं है, किन्तु उसने देश के अन्य क्षेत्रों बेंगलूर, मयसूर व अन्य इलाकों में स्थित अपने कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी है। गौरतलब है कि बेंगलूर में में विख्यात इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ साइन्स भी दिसंबर 05 में आतंकवादियों के हमले का शिकार हो चुकी है।





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