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सान्याल से बिलासपुर जेल में मिले सेन

रायपुर. नक्सली नेता नारायण सान्याल और पीयूसीएल महासचिव विनायक सेन के केस की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं। राजद्रोह के केस के ट्रायल के दूसरे दिन जेल और पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में अलग-अलग बातें सामने आई हैं।

पुलिस ने न्यायालय में केस के साथ जो रिकार्ड पेश किया, उसमें विनायक सेन द्वारा खुद को सान्याल का भाई बतलाया जाना दर्शाया गया था जबकि जेल प्रशासन ने सेन की जो चिट्ठी पेश की है, उसमें ‘भाई’ शब्द का कहीं उल्लेख नहीं है।

एकादश अपर सत्र न्यायाधीश बीएस सलूजा के न्यायालय में गुरुवार को ट्रायल के सातवें दौर की दूसरे दिन की सुनवाई हुई। नक्सली नेता सान्याल से पीयूसीएल के महासचिव सेन ने 22 जनवरी 2007 को मुलाकात की थी। पुलिस ने अपने केस में जेल के उस रजिस्टर की छाया प्रति अटैच की थी। उसमें सेन को सान्याल का भाई लिखा गया था।

पुलिस ने चालान में उल्लेख किया था कि सेन ने खुद ही सान्याल के साथ भाई का रिश्ता लिखवाया था। जेल के तत्कालीन अधीक्षक राजेंद्र गायकवाड़ को इसी बात की पुष्टि के लिए बुलवाया गया। उन्होंने न्यायालय को एक चिट्ठी पेश की।

यह पत्र सेन ने सान्याल से मुलाकात करने की अर्जी बतौर जेल अधीक्षक के नाम से लिखा था। उसमें सेन ने पीयूसीएल का ही जिक्र किया है। सान्याल के साथ किसी तरह की रिश्तेदारी नहीं दर्शाई थी। जज ने सुनवाई के दौरान जेल अधीक्षक से पूछा कि मुलाकाती रजिस्टर में ‘भाई’ शब्द कैसे लिखा गया।

अधीक्षक ने कहा कि इस बारे में जेलर ही जानकारी दे सकते हैं। कोर्ट में आज महेंद्र होटल के मदन सोनी, आंध्र के इंस्पेक्टर बी अशोक कुमार और प. बंगाल के दिलीप डे के भी बयान होने थे। वे नहीं आए। शुक्रवार को चार गवाहों वीरन मोहाली, रमेश हरपाल, विश्वास चंद्राकर और राजकुमार साहू के बयान होंगे।





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