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शहीद करकरे की यादें कोरबा के साथ भी

कोरबा. मुंबई में बुधवार की रात हुए देश के सबसे बड़े आतंकवादी हमले में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) महाराष्ट्र के मुखिया हेमंत करकरे कामा हास्पिटल में फिदायिनों से मुकाबले में मारे गए। श्री करकरे का नाम इस क्षेत्र में तब चर्चा में आया था जब अप्रैल में डॉ. मोहन सूभेदार की पुत्री मेघना सूभेदार बैंगलुरू से मुंबई होते हुए कोरबा आते समय लापता हो गई।

डॉ. मोहन सूभेदार व उनकी पत्नी डॉ. श्रीमती अंजली सूभेदार ने बताया कि वे एक साहसी, हंसमुख व निष्ठावान अधिकारी थे। डॉ. सूभेदार ने कहा वे उनके नागपुर निवासी भाई सुभाष सूभेदार के रिश्ते में साले थे। जब मेघना लापता हुई तब हमें उनका ख्याल आया। कई वर्ष बाद मिलने के बावजूद वे अत्यंत आत्मीयता से हमसे मिले।

उन्होंने मेघना सूभेदार के मुंबई से गोवा तक पहुंचने के संबंध में जानकारी जुटाई। श्री करकरे ही थे, जिनकी मदद से हम जान पाए कि मेघना ने मुंबई और गोवा में अपने एटीएम से रुपए निकाले थे। करीब पांच माह हम अपनी बेटी की पतासाजी में परेशान रहे और श्री करकरे ने हमेशा हमें दिलासा दिया कि वह सुरक्षित है और जरूर एक दिन हमें मिल जाएगी। 1982 बेच के आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे एटीएस चीफ बनने से पहले महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ रहे।

वे नागपुर में भी कमिश्नर रह चुके थे, साथ ही साथ उन्होंने केंद्रीय खुफिया एजेंसी में भी अपनी सेवाएं दी थी। श्री सूभेदार ने कहा कि न केवल श्री करकरे वरन उनके साथ शहीद हुए अन्य एटीएस, पुलिस अधिकारी तथा कर्मचारी हमारे लिए गौरव हैं। हम सभी को चाहिए कि आतंकवाद से लड़ने के लिए हम अपने मतभेदों को भुलाकर पूरी जागरूकता के साथ अपने कर्तव्य का भी निर्वहन करें, यही देश के इन वीर सपूतों को हमारी सच्ची श्रद्धांजली होगी।





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