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गरीबी के प्रदर्शन से परहेज

परदे के पीछे. खबर है कि विकास स्वरूप के उपन्यास ह्न्ञ्चड्ड से प्रेरित निर्देशक डैनी बॉयले की फिल्म ‘स्लमडॉग मिलिनेयर’ को ऑस्कर की श्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में सम्मिलित किए जाने की बात लगभग तय है और इस फिल्म का डब किया हुआ हिंदी संस्करण जनवरी में भारत में प्रदर्शित होगा। विदेशी फिल्मों में भारत का चित्रण रिचर्ड ऐटनबरो की फिल्म ‘गांधी’ को छोड़कर प्राय: दोषपूर्ण ही हुआ है, यहां तक कि डेविड लीन जैसे महान फिल्मकार से ‘पैसेज टू इंडिया’ में चूक हो गई। मीरा नायर की ‘सलाम बांबे’ अत्यंत हृदयस्पर्शी फिल्म थी। अमेरिका में बसे कुछ भारतीय लोगों को ‘स्लमडॉग मिलिनेयर’ में प्रस्तुत धारावी की गंदगी, धूल और गरीबी पर सख्त एतराज है। उनका ख्याल है कि शाइनिंग इंडिया, जिसमें पांच सितारा होटल हैं, शापिंग मॉल हैं, ही दिखाना चाहिए। भारत की झोपड़पट्टियों को सिनेमा के परदे पर प्रस्तुत करके विदेशी आलोचकों की प्रशंसा तो मिल जाती है परंतु ये उभरते हुए भारत का सच्चा चित्रण नहीं है।

नरगिस ने संसद में गरीबी के चित्रण पर सत्यजीत राय की फिल्मों की कटु आलोचना की थी और इंदिरा गांधी ने उन्हें उनकी गलती का एहसास कराया था। यह कितनी अजीब बात है कि सिनेमा में गरीबी और झोपड़पट्टी के प्रदर्शन को अनुचित बताने वाले गरीबी को हटाने या झोपड़पट्टी को स्वच्छ करने का विचार नहीं करते और ना ही सामाजिक, आर्थिक असमानता पर चिंता अभिव्यक्त करते हुए उसे मिटाने की चेष्टा करते हैं। अमेरिका में बसे अमीर भारतीय चाहते हैं कि फिल्मों में करवा चौथ, डांडिया, शिफॉन पहने मटकती हुई औरतें ही दिखाई जाएं।

अगर उन्हें गरीबी के प्रस्तुतीकरण पर एतराज है तो उस गरीबी को दूर करने का प्रयास क्यों नहीं करते। एक फिल्मकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इन्हें क्यों खटकती है? ‘स्लमडॉग..’ आधारित है अमिताभ बच्चन द्वारा प्रस्तुत ‘कौन बनेगा करोड़पति’ पर जो अमेरिका में प्रस्तुत सफल शो ‘हू वांट्स टू बी ए मिलिनेयर’ का भारतीय संस्करण था। फिल्म में एक झोपड़पट्टी में रहने वाला गरीब और अशिक्षित लड़का सही उत्तर देकर शिखर पुरस्कार हासिल करता है। उस पर आरोप है कि उत्तर उसे कहीं से मिल गए थे और पुलिस द्वारा की गई छानबीन में कई कहानियां उजागर होती हैं। भारत में भी संदेह व्यक्त किया गया था। इसे सिनर्जी के सिद्धार्थ बसु ने प्रस्तुत किया था और उनकी ईमानदारी तथा कर्तव्यपरायणता पर सवाल उठाया ही नहीं जा सकता। बसु और उनकी टीम पूरी तरह से समर्पित और ईमानदार है।बहरहाल अमेरिका में फिल्म की प्रशंसा हो रही है। भारत अमेरिका के मौजूदा दौर में अत्यंत लोकप्रिय है। भारतीय संगीत, आयुर्वेद, योग और फिल्में काफी लोकप्रिय हैं।





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