Breaking News 
bhaskar Web English


HomeVichaar Vichaar

सेंसेक्स नहीं, जनता का आत्मविश्वास टूट रहा है

मुंबई पर आतंकवादी आक्रमण सौ करोड़ की आबादी वाले राष्ट्र के पुरुषत्व को चुनौती है। खून के प्यासे मुट्ठी भर आतंकियों ने महानगर मुंबई को बंधक बना लिया है और समूचा राजनीतिक तंत्र बारूद का जवाब बयानों से दे रहा है।

मुंबई उदाहरण है कि देश के राजनीतिक दलों और उसे संचालित करने वाले हमारे माई-बाप राष्ट्रीय सुरक्षा को अपने चुनावी हथकंडों की नगरवधु की तरह इस्तेमाल करने में लगे हैं। महाराष्ट्र देश के गृहमंत्री का गृह प्रदेश है और बम धमाकों की लगातार हो रही घटनाएं उनकी जुल्फों का एक बाल भी बांका नहीं कर पाई है।

इस बार किसी विमान का अपहरण कर उसे कंधार नहीं ले जाया गया है। मुंबई का ही अपहरण कर उसे कंधार के हवाई अड्डे में तब्दील कर दिया गया है। पूछा जाना चाहिए कि ऐसे समय जबकि देश के बहादुर जवान और सेना के कमांडो जानें हथेलियों पर लिए हुए अपनी आंखों के सामने नंगी नाच रही मौत के साथ दो-दो हाथ करने में व्यस्त हैं, हमारे राष्ट्रीय नेता मुंबई की हवाई फेरियां किस मकसद से लगा रहे हैं?

निरपराध लोगों के खून से लहूलुहान मुंबई को क्या कुछ दिनों के लिए सत्ता की गंदी राजनीति से मुक्त नहीं रखा जा सकता ? हरेक हादसे के दौरान या उसके बाद लोगों को ‘इमोशनली ब्लैक मेल’ करने के षड्यंत्रों पर कभी रोक लगेगी भी कि नहीं। यह कोई प्राकृतिक आपदा या ईश्वरीय प्रकोप नहीं है।

आतंकवाद की इस सूनामी से मुकाबला राहतों के पैबंदों से नहीं हो सकेगा। अगर मुट्ठी भर आतंकवादी मुंबई जैसे महानगर को बंधक बना सकते हैं तो इस दहशत पर गौर किया जा सकता है कि समूचे देश को लकवाग्रस्त करने की हिमाकत कुल कितने आतंकी कर सकते हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तरों पर होने वाली चूकों की भरपाई निरपराध नागरिक और बहादुर जवान कर रहे हैं। राष्ट्र के धर्य की परीक्षा ली जा रही है। शायद प्रतीक्षा की जा रही है कि जो कुछ चल रहा है वह कभी तो थमेगा ही।

फिर लोगों के आंसुओं को कविताओं में बदला जाएगा । खून की परतों में से बलिदानों की कहानियां ढूंढ़ी जाएंगी । मुंबई के लिए किसी और बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाएगी। बताया जाएगा कि देश की इस आर्थिक राजधानी को शंघाई में तब्दील करने में विलंब नहीं होगा । पर देश को यह जवाब फिर भी नहीं मिलेगा कि आगे क्या होने वाला है। आतंकवाद के उस जिन्न को बोतल में बंद कैसे किया जाएगा जो बोतल में कभी था ही नहीं ।

देश के राजनीतिक दल और सत्ता की लूट-खसोट के लिए किसी भी तरह के गठजोड़ से परहेज नहीं करने वाले नेता चाहे कुछ समय के लिए ही सही, क्या अपनी दूकानों पर ताले लगाकर देश का सही नेतृत्व करने का आश्वासन सौ करोड़ लोगों को दे सकते हैं? क्या वे यह भरोसा दिला सकते हैं कि आतंकवाद के अहम् मसले से निपटने के लिए वे अपने समस्त राजनीतिक पूर्वाग्रहों को अरब सागर में डुबाकर किसी राष्ट्रीय सहमति पर पहुंचने के लिए तैयार हैं ?

क्या देश को आश्वस्त किया जा सकता है कि आतंकियों द्वारा बिछाए गए बारूद से उठने वाली आग का इस्तेमाल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए नहीं बल्कि संकल्पों का फौलाद गढ़ने के लिए किया जाएगा । नागरिकों में सैनिकों जैसे गुणों की अपेक्षा तो की जा सकती है पर सौ करोड़ नागरिकों को सौ करोड़ सैनिकों की वर्दियों में ढूंढ़ने की कोशिशों से बाज आना चाहिए । दाव पर मुंबई के शेयर बाजार का सेंसेक्स नहीं, लोगों का टूटता हुआ आत्मविश्वास है और उसकी हर हाल में रक्षा होनी चाहिए ।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: