|
जालंधर. अल कायदा के चीफ ओबामा बिन लादेन और लश्कर के चीफ प्रो हफीज सईद के बीच काफी पुराने संबध हैं। लश्कर और अल कायदा दोनों इंटरनेशनल इस्लामिक फ्रंट के सदस्य भी हैं। इंटरनेशनल इस्लामिक फ्रंट जेहादी संगठनों का गठबंधन है। खलीद अवान ने अलकायदा के लश्कर के साथ संबधों का किया था खुलासा :
अमरीका की एजेंसी एफबीआई(फेडरल ब्यूरो आफ इंटलीजेंस) को अलकायदा और लश्कर- ए-तैयबा के सबंधों की जानकारी अलकायदा के कुख्यात आतंकवादी खलीद अवान ने दी थी। अलकायदा के इस आतंकी को सन 2004 में न्यूयार्क में एफ बीआई ने पकड़ा था। उसने खुलासा किया है कि वह अमरीका और कनाडा से धन जमा कर पाकिस्तान, भारत, इराक आदि देशों में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को भेजा करता था।
भारत में वह आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर- ए-तैयबा और खालिस्तान कमांडो फोर्स तथा बब्बर खालसा धन भेजता था। खलीद अवान को न्यूयार्क की बुकलिन कोर्ट ने उसे बीते साल सजा सुनाई थी। एफबीआई की मदद के लिए पंजाब पुलिस ने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी को अमरीका भेजा था। इस अधिकारी की गवाही पर ही खलीद अवान को सजा हुई थी।
कहां से मिलता है फंड: अल कायदा को खाड़ी के देशों में रहने वाले अमीरों से फंड मिलता है । अल कायदा ने स्टाक एक्सचेंज और रीयल एस्टेट में भी निवेश कर रखा है। वहां से भी उसे फंड मिलता है। हरकत उल मुजाहिदीन ,हरकत उल जेहादे इस्लामी, लश्कर- ए-तैयबा ,जैश ए मोहम्मद ,सिमी जैसे संगठन भारत में अल कायदा को मदद देते हैं।
मुजफ्फराबाद में चल रहे हैं आतंकियों के चार नए प्रशिक्षण कैंप
पाकिस्तान की गुप्तचार एजेंसी आईएसआई से संरक्षण प्राप्त आतंकवादी संगठन लश्कर- ए-तैयबा ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मुजफ्फराबाद में चार प्रशिक्षण कैंप शुरू कर दिए हैं । इन कैपों में अल कायदा के प्रशिक्षक ट्रेनिंग दे रहे है। आर्मी इंटेलीजेंस के मुताबिक अल कायदा के लिए मुरादी में चल अपने इस्लामिक स्टडी सेंटर में लश्कर आतंकियों की पौध तैयार करता है। यह सेंटर लाहौर से 15 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम लाहौर के गुजरावाला रोड पर मुरीदी में है। इसका प्रमुख मौलवी अब्दुल सलाम बटबी है। इस सेंटर का नाम मुदरकी मारकीजे तैयबा है और यह 200 से 250 एकड़ में फैला हुआ है। यहां एक समय में तीन से चार हजार तक आतंकी प्रशिक्षण लेते हैं। जिनको 400 लोगों का स्टाफ प्रशिक्षण देता है।
चार चरणों में दिया जाता है प्रशिक्षण
आतंकियों को चार चरणों में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए उन्हें चार अलग-अलग कैंपों में प्रशिक्षण दिया जाता है। पहले कैंप को उमर कौरा कहा जाता है। यहां नए भर्ती युवकों को 21 दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है, उनको एके 47 राइफल से लेकर छोटे पिस्टल चलाने तक की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद दूसरा अकासा कैंप होता है। आतंकवादियों को यहां आगे का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह तीन महीने का होता है, जिसमें प्रमुख कमांडो ट्रेनिंग होती है। तीसरे कैंप अब्दुला बिन मसूद में चुने हुए खास आतंकियों को पांच महीने की विशेष कमांडो ट्रेनिंग दी जाती है। चौथे कैंप मसकत में विदेशी युवकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इनमें इस समय खाड़ी के देशों, इंडोनेशिया और कुवैत से आए युवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।