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International International मुंबई पर आतंकी हमले का असर दुनिया के कोने-कोने में किस कदर हुआ है, इसका अंदाजा वहां के मीडिया में इन हमलों की कवरेज से लग जाता है। अमेरिका व ब्रिटेन के अलावा पाकिस्तान में इसकी ज्यादा अहमियत इसलिए कही जा सकती है कि इस हमले में आतंकियों ने ब्रिटिश एवं अमेरिकी नागरिकों को खासतौर पर निशाना बनाया है और आतंकियों के बारे में यह लगभग पुख्ता तौर पर साबित हो चुका है कि वे कराची से एक मालवाहक जहाज पर सवार होकर मुंबई के नजदीक पहुंचे थे।
पाक एजेंसी का हाथ होने के सुबूत मिल गए तो क्या होगा? : ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा है कि ये हमले न सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच शांति के लिए चल रही कोशिशों को धक्का पहुंचाएंगे, बल्कि इस इलाके में दोस्ताना माहौल बनाने के अमेरिकी प्रयासों को भी इससे धक्का लगेगा। अखबार लिखता है कि अगर इस हमले में पाकिस्तान या किसी पाक एजेंसी का हाथ होने के सुबूत मिल गए तो क्या होगा? अखबार के मुताबिक, अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा की विदेश नीति के मुख्य बिंदुओं में भारतीय उपमहाद्वीप में शांति लाना भी है।
अल-कायदा से इनके संबंध को नहीं नकारा जा सकता : ‘द गार्जियन’
लंदन से छपने वाले ‘द गार्जियन’ ने पहले 8 पेज मुंबई हमले को दिए हैं और चश्मदीदों की जुबानी घटनास्थल के मंजर पेश किए गए हैं। इस बात पर मंथन किया गया है कि हमलों को अंजाम देने वाले आतंकी कौन हैं? अखबार कहता है कि हमला करने के इनके तरीके को देखते हुए अल-कायदा से इनके संबंध को नहीं नकारा जा सकता, हालांकि बंधक बनाकर रखने वाला कदम अल-कायदा का नहीं हो सकता। अखबार ने यह भी कहा कि विदेशी खुफिया एजेंसियों को भी इस आतंकी हमले की भनक नहीं लगी।
भारतीय राजनीति के लिए बहरा कर देने वाला धमाका : ‘द टाइम्स’
लंदन के ही ‘द टाइम्स’ ने पूछा है कि अमेरिकी एवं ब्रिटिश मृतक आखिर हैं कहां, और शुक्रवार को सुरक्षाबलों ने जो शव बरामद किए हैं कहीं उनमें तो ब्रिटिश व अमेरिकी नागरिक नहीं हैं? अखबार ने इजरायली अधिकारियों के इस आरोप को प्रमुखता दी है कि भारतीय सुरक्षाबलों के बचाव कार्य सुनियोजित नहीं हैं। इन अधिकारियों ने कहा कि बंधक बनाने जैसे हालात में सुरक्षाबलों को पहले घटनास्थल को नियंत्रण में लेना चाहिए था, न कि आते ही गोलीबारी शुरू कर देनी चाहिए थी।
अखबार ने लिखा है कि अगर यह हमला बराक ओबामा के इस बयान का जबाव है कि अमेरिका अल-कायदा को खत्म करने के लिए पाक के कबायली इलाकों में जाएगा, तो भी यह बिखरी हुई भारतीय राजनीति के लिए बहरा कर देने वाला धमाका भी है।
भारत की सुरक्षित देश होने की छवि खत्म : ‘द टेलीग्राफ’
ब्रिटेन के ‘द टेलीग्राफ’ ने बंधकों में ब्रिटिश नागरिकों की खबर को प्रमुखता देते हुए लिखा है कि भारत की सुरक्षित देश होने की छवि खत्म हो गई है। अंदर के पेजों पर गिरफ्तार संदिग्ध आतंकियों में दो ब्रिटिश नागरिकों के होने की बात को जगह दी है। अखबार ने यह भी लिखा है कि कई देशों ने आतंकियों पर काबू पाने की भारत की असफलता पर उसकी आलोचना की है। इस बात को लिखा गया है कि बंधकों को छुड़ाने के लिए इजरायल व अमेरिका के मदद प्रस्तावों को भारत ने ठुकरा दिया।, जबकि वह खुद आतंकियों पर पार पाने में अब सक सफल नहीं रहा है।
हमला बाहरी मदद से किया गया : ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’
अमेरिकी अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लगातार दूसरे दिन मुंबई पर आतंकी हमले को पहली खबर बनाया है। साथ ही इस तरफ इशारा किया है कि यह हमला किसी बाहरी मदद के बिना अंजाम नहीं दिया जा सकता था। अखबार ने इन हमलों की दुनिया में अन्य जगह हुए हमलों से तुलना भी की है। अंदर के पेजों पर हमले में मरने वाले अमेरिकी नागरिकों और चश्मदीदों की बातें ली गई हैं। आतंकियों से सुरक्षाबलों की मुठभेड़ की भी इस अखबार ने विस्तार से खबर दी है।
मुंबई की चाबी फिलहाल आतंकियों के हाथ में : ‘द डान’
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘द डान’ ने लिखा है कि मुंबई धमाकों के बाद फिर से पाकिस्तान के सिर पर ठीकरा फोड़ने का काम शुरू हो गया है। अखबार लिखता है कि भारतीय कमांडो मुंबई पर फिर से नियंत्रण पाने के लिए जंग लड़ रहे हैं। इशारा साफ है कि मुंबई की चाबी फिलहाल आतंकियों के हाथ में है। पहले पन्ने पर ही खबर है कि यह हमला भारत-पाक के बीच शांति प्रक्रिया के लिए बड़ी चुनौती है। पाक राष्ट्रपति की ओर से इन हमलों की निंदा करने को भी अखबार ने प्रमुखता दी है।