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आलोचना को सहज तरीके से स्वीकार करें

विकास मंत्र. अपनी आलोचना होना या खिल्ली उड़ना किसी भी व्यक्ति को पसंद नहीं आता। किसी भी व्यक्ति का गलतियां करना अपमानजनक होता है, खासतौर पर जनता के बीच गलतियां करना। मूर्ख दिखने के बड़े डर में बहुत से छोटे-छोटे डर शामिल हैं- उच्चरण और व्याकरण की गलतियां करने का डर, क्या बोलना है यह भूल जाने का डर, किसी को चोट पहुंचाने का डर और बाद में लोगों द्वारा हमारी गलतियां बताए जाने का डर।

हर व्यक्ति आलोचना को नापसंद करता है। आलोचना से निपटने का तरीका है बिना घबराए इसे तारीफ की तरह स्वीकार करें। उदाहरण के रूप में देखें तो जिस आदमी की सबसे ज्यादा आलोचना होती है, वह कोई निम्न तबके का या छोटा काम करने वाला व्यक्ति नहीं होता। सबसे ज्यादा आलोचना जिसकी होती है वह बड़े पद पर विराजमान व्यक्ति होता है। वह देश का राष्ट्रपति हो सकता है। न सिर्फ कुछ पत्रकार राष्ट्रपति की कही हर बात की बुराई करते हैं, बल्कि अज्ञानी और निकम्मे लोग भी उनकी जमकर आलोचना करते हैं।

किसी कंपनी के गेटकीपर के व्यवहार की आलोचना कोई नहीं करता, परंतु उसी कंपनी के बोर्ड के चेयरमैन की बातों और कामों में खामियां निकालने में लोग पीछे नहीं रहते। इसलिए इस बात से घबराने की कतई आवश्यकता नहीं है कि आपकी आलोचना या बुराई हो रही है।

यह इस बात का प्रमाण है कि आप विकास कर रहे हैं। इसीलिए कहा जाता है कि फायरिंग लाइन में वही रहते हैं, जो मजबूत होते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की आलोचना से घबराएं नहीं उनका डटकर मुकाबला करें। यदि आप सच्चे हैं तो कोई भी, कभी भी आपका अहित कर ही नहीं सकता। देर हो सकती है, अंधेर नहीं। इसलिए गर्व का अनुभव करें।





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