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इंदौर. इंदौर प्रदेश में एकमात्र जिला है जहां ‘पहल’ योजना के तहत शत प्रतिशत महिलाओं का पंजीयन किया जा रहा है और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत मिलने वाले बजट का 90 प्रतिशत उपयोग में लिया जा रहा है।
यह बात सामने आई दिल्ली में स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में। मप्र में एनआरएचएम के तहत बेहतर काम करने पर इंदौर जिले को पुरस्कृत किया गया। सभी प्रदेशों से एक-एक जिले का चयन किया गया था। खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों को भी बुलाया गया था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शरद पंडित ने स्वास्थ्य विभाग इंदौर द्वारा किए गए कई कार्यो को सराहा। इनमें प्रमुख मनोरमा राजे टी.बी. अस्पताल, हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक का आईएसओ सर्टिफिकेट व ४क्+क्लिनिक ‘चेतना’ को काफी पसंद किया गया। इंदौर प्रदेश में पहला जिला है जहां पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से अस्पताल चलाया जा रहा है। जननी सुरक्षा योजना में महिलाओं की भागीदारी और शिशु-मृत्युदर में कमी का प्रतिशत भी दूसरे जिलों से बेहतर था।
इंदौर में ही एनआरएचएम के तहत मिलने वाले बजट का 90 प्रतिशत खर्च हुआ है। बाकी जिले इस मामले में पीछे रहे। ई-बैंकिंग भी विकासखंड स्तर तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण अस्पतालों में सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध होने लगी है। जिले में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक गरीब बस्ती में 330 कैंप लगाए जा चुके हैं। मोनिका मंडलोई, मनीषा अग्रवाल व अनिल विश्वकर्मा ने जिले का प्रतिनिधित्व किया।