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इंदौर. शांत, निश्छल..गौरव, उसके चेहरे पर 26 नवंबर की रात के खौफनाक मंजर का लेसमात्र अंश भी नहीं था। गोया वह उन आंतकियों को मौन ललकार दे रहा हो कि तुम भारत की युवा पीढ़ी को कभी डरा नहीं पाओगे। तुम उनके हौंसलों को कभी पस्त नहीं कर पाओगे। वह तुम्हारे नापाक इरादों पर हर बार बुलंदी से सपनों का ध्वज फहराएंगे।
मुंबई में आतंकी हमले का शिकार हुए 23 वर्षीय गौरव जैन का शव शुक्रवार सुबह साढ़े सात बजे विमान से इंदौर लाया गया। इससे पहले 24 घंटे की मशक्कत के बाद जीजा राजीव जैन और फुफेरे भाई लोकेश को मुंबई के सेंट जार्ज अस्पताल से शव मिला। उनके साथ गौरव के वरिष्ठ अधिकारी श्री राव भी आए। मौसेरे भाई गिरीश जैन और सचिन जैन पहले से ही एंबुलेंस लेकर एअरपोर्ट पहुंच गए थे। ये लोग लगभग आठ बजे शव लेकर 62/१२, मनोरमागंज पहुंचे तो मां कांता जैन लिपटकर रो पड़ीं।
वे कभी उससे बात करती तो कभी उसे मनाती और कभी उसे पुकारकर बेसुध सी हो जाती। गौरव..मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि तू चला गया। तू मत जा। तू चला जाएगा तो मैं हिम्मत हार जाऊंगी। बहन स्नेहा, सपना, सीमा और निवेदिता भी शव से लिपटकर रो पड़ीं। वहीं गौरव के पिता बालचंद्र जैन शून्य में ताकते बाहर कुर्सी पर बैठे थे। वे थोड़ी-थोड़ी देर में भीतर जाते और पलभर के लिए रुककर कहते मुझे एक बार उसे जी भर देख तो लेने दो। फिर वे चुपचाप बाहर जाकर बैठ जाते।
यह हृदय विदारक दृश्य देख कोई भी नियति को दोष नहीं दे रहा था बल्कि लोगों की आंखों में जितने आंसू थे उनसे कहीं ज्यादा गुस्सा था। आतंकवादियों और उस नाकारा तंत्र के खिलाफ जिसने गौरव को छीनकर उसके माता-पिता को बेसहारा कर दिया। अंतिम संस्कार तिलक नगर मुक्तिधाम में किया गया। शवयात्रा में समाज के लोगों के साथ विधायक महेंद्र हार्डिया भी शामिल हुए।
पहली गोली ही गौरव को लगी
श्री राव ने बताया गौरव अपने दोनों दोस्तों को साथ नरीमन पाइंट स्थित होटल में खाना खाने गए थे। वे बैठे ही थे कि पीछे से आतंकियों ने गोलियां चलाना शुरू कर दी। जो युवक बच गया उसने बताया कि आतंकियों की पहली गोली ही गौरव के सिर में लगी थी। फिर मलकेश को गोलियां लगी। इसके बाद ये दोनों सौरभ जैन पर गिर पड़े जिससे वह बेसुध हो गया था लेकिन उसकी जान बच गई।