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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. काश! यह चुनाव का मौसम कभी खत्म नहीं होता, हमेशा ऐसा ही सीजन रहता और हमारी खूब लगती। न तो काम की तलाश होती और न ही मेहनताने की। ऐसा सोचना है उन लोगों का जिन्हें विधानसभा चुनाव के चलते रोजगार मिल गया था।
चुनाव-प्रचार खत्म होते ही कई लोगों के सामने रोजगार का संकट फिर खड़ा हो गया है। जबकि इससे पूर्व के 15-20 दिन उनके चैन से कट गए। कोई खास काम भी उनके जिम्मे नहीं था। नारे लगाना और पूरे दिन गाड़ियों में घूमना ही उनकी दिनचर्या थी।
इसके एवज में किराए के कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन 70 से 100 रुपए तक मिल जाते थे, ऊपर से खाना अलग से। विदित हो कि जिले की पांच विधानसभा सीटों से चुनाव मैदान में उतरे प्रमुख दलों के सभी प्रत्याशियों ने अपने साथ भीड़ जुटाने के लिए भाड़े के कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी कर रखी थी। विधानसभा चुनाव उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुए जिनके पास फिलहाल कोई काम नहीं था। बैठे-बिठाए ऐसे सैंकड़ों लोगों को रोजगार मिल गया।
किराए के कार्यकर्ताओं को प्रत्याशियों की जीत-हार से कतई मतलब नहीं था, उनका काम तो सिर्फ उस प्रत्याशी की जय-जय कार करना, जो इन्हें मजदूरी देता था। अब विधानसभा चुनाव समाप्त हो चुके हैं तो ऐसे लोगों को भी चुनाव कार्य से मुक्ति मिल गई, जो प्रतिदिन मजदूरी के हिसाब से चुनाव कार्य करते थे। अभी दो-चार दिन इनको आर्थिक संकट इसलिए नहीं खलेगा, क्योंकि चुनाव की मजदूरी के रूप में अभी इनकी जेब गर्म हैं, लेकिन अब आगे चिंता जरूर सताने लगी है कि यह पैसे खत्म होने के बाद क्या करेंगे? शहर में चार पहिया का ठेला छोड़कर एक प्रत्याशी के चुनाव कार्य में लगे राम सिंह और मनीराम ने बताया कि इस विधानसभा चुनाव में उन्होंने घर खर्च चलाने के बाद लगभग एक-एक हजार रुपया कमा लिया।
कम मेहनत और अधिक मजदूरी मिलने से उन्हें तो विधानसभा चुनाव बहुत रास आए। वह कहते हैं कि उनका काम सिर्फ कार्यालय से झण्डे-बैनर लेकर गांवों में प्रत्याशियों के समर्थकों तक पहुंचाना था और वह भी जीप में बैठकर।