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नई दिल्ली. मायानगरी मुंबई में हुए ताजा आतंकी हमलों के मद्देनजर बड़े होटलों, मॉल्स और सार्वजनिक स्थलों पर तैनात निजी सुरक्षा एजेंसियां भी अपने को आधुनिक हथियारों से लैस करना चाहती हैं। इन एजेंसियों का मानना है कि इन्हें भी अर्ध स्वचालित हथियार रखने की इजाजत मिलनी चाहिए।
देश की सबसे बड़ी निजी सुरक्षा एजेंसी में एक सिक्युरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विस के मुख्य प्रबंध निदेशक आरके सिन्हा ने कहा कि निजी सुरक्षा गार्ड आज रक्षा की पहली पंक्ति में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में बदली सुरक्षा परिस्थितियों से निबटने के लिए इन्हें भी आधुनिक हथियारों से लैस किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि मुंबई के ट्रायडेंट होटल में हुए आतंकी हमले में दो सुरक्षा गार्डस को आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया था। ये गार्डस सुरक्षा के नाम पर केवल डंडा लिए हुए थे।
एक अन्य निजी सुरक्षा एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मुंबई हमलों के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हमें महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने को कहा है। हालांकि हम प्रवेश द्वार पर स्कैनर लगाने जा रहे हैं, लेकिन यह इसे पूरी तरह से पुख्ता इंतजाम नहीं माना जा सकता। इस एजेंसी के पास राजधानी की महत्वपूर्ण स्मारक स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे गार्डस आधुनिक हथियारों से लैस नहीं होंगे, हम आतंकी हमलों जैसी परिस्थितियों को नियंत्रित नहीं कर सकते।
गृह मंत्रालय से चर्चा करेंगे: निजी सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को गृह मंत्रालय के समक्ष उठाने जा रही हैं। सिन्हा कहते हैं कि सरकार को सुरक्षा एजेंसियों के लिए वर्गीकृत प्रणाली पर काम करते हुए उनके गार्डस को ऐसे हथियार रखने की इजाजत देनी चाहिए। समस्या यह है कि हर किसी को ऐसे हथियार नहीं दिए जा सकते।
क्या है मौजूदा नियम
मौजूदा निजी सुरक्षा एजेंसी अधिनियम 2005 के अनुसार निजी सुरक्षा गार्डस को अति आधुनिक किस्म के हथियार रखने की इजाजत नहीं है। इनके गार्डस 12 बोर की बंदूक, पाइंट 315 राइफल और पाइंट 32 पिस्टल और रिवाल्वर ही रख सकते हैं।
तैनाती कहां: निजी सुरक्षा गार्डस बड़े होटलों के अलावा देश के महत्वपूर्ण स्मारकों, धर्मस्थलों, बैंक और शापिंग माल्स में तैनात किए जा रहे हैं।