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मुंबई.
ताज होटलः अरब सागर और गेट वे ऑफ इंडिया का खूबसूरत नजारा दिखाता ताजमहल पैलेस एंड टॉवर होटल वास्तव में भारत की आर्थिक राजधानी की सरताज धरोहर है। आतंकी इसे मिट्टी में मिलाने आए थे।
सर्विस डोर से घुसे : बुधवार रात साढ़े नौ बजे ताज होटल और अपोलो बंदर तब खूनी मंजर के गवाह बने जब आतंकी ताज के सर्विस डोर से अंदर आए और अंधाधुंध गोलीबारी करने के साथ ग्रेनेड फेंकने लगे। कुछ ही देर में पुलिस ने परिसर घेर लिया और संघर्ष शुरू हो गया। रात एक बजे होटल के बीच वाले गुंबद में धमाका हुआ व धुएं का गुबार उठने लगा।
चारों ओर खून : सुबह पांच बजे एनएसजी कमांडो पहुंच गए। आतंकी ताज के विशिष्ट क्लब चैबर्स में छिप गए। 17वीं मंजिल के एक कमरे में 26 घंटे फंसे रहने वाले अमेरिकी दंपती ब्रूस व पेटी ने सिहरते हुए कहा, ‘हमने आतंकी नहीं देखे। उनका खौफ महसूस किया। हमारे चारों ओर खून ही खून था।’ होटल में फंसे चार सांसदों में से एक बसपा के एल प्रसाद ने कहा, ‘मौत हमारे काफी करीब थी।’
तीन धमाके : गुरुवार सुबह छह बजे पुलिस, सेना और नौसेना के जवान होटल को घेरकर मुठभेड़ के लिए तैयार हुए। इसी के साथ तीन बड़े धमाके हुए। ऑपरेशन खत्म होने तक 40 से ज्यादा धमाके हो चुके थे।
मेजर शहीद : शुक्रवार दोपहर एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन एक टीम का नेतृत्व करते हुए अंदर गए। वे आगे जाकर अकेले पड़ गए और आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।
अंतिम संघर्ष : शनिवार को एनएसजी कमांडो ने अंतिम हमला शुरू किया। क्रिस्टल बॉलरूम में छिपे आतंकी अंधाधुंध गोलीबारी कर रहे थे। कमांडो ने आग जलाकर धुआं पैदा किया और आतंकी खुले में आने पर मजबूर हुए।
पांच अरब में होगी क्षतिपूर्ति : 60 घंटे बाद ऑपरेशन टारनेडो खत्म। होटल से कुल 300 लोगों को बचाया गया। वहां 22 शव बरामद हुए। ताज का पुराना स्वरूप बहाल करने में 12 माह और करीब पांच अरब रुपए लगेंगे।