|
मुंबई.
ट्रायडेंट ओबेरायः मरीन ड्राइव के सुदूर छोर पर ओबेराय होटल की शानदार इमारत अरब सागर का नजारा लेती हुई दिखाई देती है। कुछ साल पहले होटल के एक हिस्से को ट्रायडेंट का नाम दिया गया। चौतीस मंजिला ट्रांयडेंट में 541 और 11 मंजिला दूसरे हिस्से में 327 कमरे हैं।
आतंक का साया : मुंबई के शानदार प्रतीकों में से एक इस होटल पर 26 नवंबर 2008, बुधवार को रात 9:35 बजे आतंक का काला साया पड़ा जब कुछ आतंकी अंधाधुंध गोलीबारी करते हुए होटल की लॉबी में घुसे।
विदेशियों को अलग किया : आतंकियों के चंगुल से बच निकले एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ‘हाथों में एके 47 रायफल लिए 20 से 25 साल के छह युवक धड़धड़ाते हुए होटल में घुसे। अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उन्होंने गरजकर पूछा ‘ब्रिटेन और अमेरिका के कौन हैं? वहां मौजूद 18 लोगों में से छह ब्रिटिश और अमेरिकी नागरिक थे। आतंकियों ने इन सभी को अलग से बंधक बना लिया।’ इसी आपाधापी में यह प्रत्यक्षदर्शी बचकर भाग निकला था।
बयालीस घंटे का खौफ : रात दो बजे सुरक्षा बल पहुंचे और गुरुवार की सुबह एनएसजी ने मोर्चा संभाला। अगले 42 घंटों तक आतंकियों व सुरक्षा बलों के बीच भयानक संघर्ष हुआ। आतंकियों द्वारा किए ग्रेनेड धमाकों से इमारत धधक उठी। शुक्रवार दोपहर बाद वहां छिपे दो आतंकियों के मारे जाने के साथ ऑपरेशन खत्म हुआ। शेष आतंकियों में से कुछ पहले ही मारे जा चुके थे जबकि कुछ अन्य के फरार होने की आशंका है। होटल से कुल 40 शव बरामद हुए। चालीस विदेशियों सहित वहां से करीब दो सौ लोगों को मुक्त कराया गया। बयालीस घंटों का यह खौफ वहां फंसे लोग शायद ही कभी भूल पाएंगे।
दिनशॉ, कपूर नहीं रहे : ऑपरेशन पूरा होने के बाद पता चला कि यस बैंक के गैरकार्यकारी चेयरमैन अशोक कपूर और मार्शल आर्ट विशेषज्ञ फरोख दिनशॉ भी आतंकियों की गोलियों के शिकार लोगों में थे। दिनशॉ को ट्रायडेंट के रेस्त्रां में गोली लगी थी और उनकी मौत बॉम्बे अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।
>> मैं अपने दोस्त इमानुल की खैरियत को लेकर फिक्रमंद रहीं, जो ओबेरॉय में शेफ हैं। लेकिन अब इमानुल के सकुशल होने की खबर से मैं खुश हूं। इस मोड़ से चीजें और बेहतर हो सकती हैं.. और होंगी।
- रोजा कैटलानो, मुंबई में रह रहीं इटली की नागरिक