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नई दिल्ली. हमले के मामले में पाक को बेनकाब करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री कार्यालय दुनिया के शीर्ष नेताओं को एक विस्तृत कान्सेप्ट पेपर भेजने की तैयारी कर रहा है। संभावना है कि इस कानसेप्ट पेपर में मुंबई आतंकी हमले में खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने के सबूत दिए जा सकते हैं। कान्सेप्ट पेपर में हमले मामले में पकड़े गए आतंकी से पूछताछ में सामने आए तथ्यों के साथ पाक में आतंकियों की बातचीत के सबूतों को शामिल किया जाएगा।
पीएमओ में इस कान्सेप्ट पेपर का ड्राफ्ट बनना शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार चूंकि मुंबई आतंकी हमले में अनेक विदेशी मारे गए हैं और विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सार्वजनिक रूप से हमले में पाकिस्तान के कुछ तत्वों के हाथ होने की बात कही है। ऐसे में दुनिया के शीर्ष नेता इस कान्सेप्ट पेपर को गंभीरता से लेते हुए पाक पर दबाव बढ़ाएंगे।
मुखर्जी के सख्त तेवर: सूत्रों के अनुसार हालांकि पश्चिमी देश विशेषकर अमेरिका का मानना है कि हमले में पाक सरकार का हाथ होने का कोई सबूत नहीं हैं, लेकिन वह इतना अवश्य मान रहा है कि मुंबई पर आतंकी हमले का प्लान और निर्देश पाकिस्तान से ही मिले। बताया जाता है कि अमेरिकी दबाव के कारण ही पाक सरकार आईएसआई चीफ को पहले भारत भेजने के लिए तैयार हो गई थी, लेकिन मुखर्जी द्वारा पाक अफसरों से सख्त तेवरों में बात करने के साथ-साथ पाक सेना की आपत्ति और अंदरूनी विरोध को देखते हुए बाद में उसने यू-टर्न ले लिया। उसने अब आईएसआई चीफ की जगह एक प्रतिनिधि भेजने की बात कही है।
तनाव की आशंका: पाक सरकार की ओर से अनौपचारिक रूप से मीडिया में यह खबरें भी दी जा रही है कि अगर भारत के साथ तनाव बढ़ता है तो अफगानिस्तान सीमा पर तैनात सेना को भारत की तरफ तैनात किया जा सकता है। विदेश मंत्रालय के सूत्र भी मानते हैं कि भारत-पाक रिश्तों में एक बार फिर तनाव पैदा होने की आशंका है।
कैबिनेट कमेटी की बैठक : संभावना है कि मंगलवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में मुंबई आतंकी हमले के संदर्भ में सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले किए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने शनिवार को रक्षा और खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक में भी मुंबई हमले और अन्य मामलों में पाक का हाथ होने के बारे में ठोस जानकारी एकत्र करने के लिए कहा है, ताकि तैयार होने वाला कान्सेप्ट पेपर ठोस सबूतों के साथ भेजा जाए।
विदेश मंत्रालय चुप: इस बीच, पाक द्वारा आईएसआई चीफ को भारत भेजने के फैसले से पलटी मारने पर विदेश मंत्रालय फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है। पाक की ओर से कहा गया है कि दोनों देशों के प्रमुखों के बीच गलत फहमी के कारण ऐसा हुआ है। हमने डायरेक्टर स्तर का अधिकारी भेजने की बात कही थी, न कि डायरेक्टर जनरल। साथ ही अभी जांच तो चल ही रही है। जरूरी हुआ तो बाद में दोनों देशों की खुफिया एजेंसी के प्रमुख मिल सकते हैं।