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नई दिल्ली. मुंबई पर समुद्री रास्ते से हमले की आशंका जताते हुए केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने महाराष्ट्र सरकार को एक नहीं, बल्कि तीन बार आगाह किया था। इस संबंध में आखिरी बार 18 नवंबर को चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसे भी अनदेखा कर दिया गया। इसके आठ दिन बाद ही 26 नवंबर को मुंबई पर हमला हो गया।
सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तटरक्षक बल और महाराष्ट्र पुलिस इन खुफिया सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए समय पर कार्रवाई करने में नाकाम रही। सूत्रों का दावा है कि इंटेलीजेंस ब्यूरो और महाराष्ट्र की सुरक्षा एजेंसियों को मुंबई पर हमले से चार दिन पहले ही यह बता दिया गया था कि कराची से लश्करे तैयबा का एक जहाज रवाना हुआ है। सूचना में यह भी बताया गया था कि जहाज में सवार आतंकियों की मंजिल मुंबई है। खुफिया एजेंसियों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 24 सितंबर को यह खुफिया सूचना मिली थी कि कराची में लश्कर के आतंकी मुंबई के ताज होटल पर हमले की योजना बना रहे हैं।
यहां तक कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से भी सूचना मिली थी कि आतंकी समुद्र के रास्ते से भारत में हमला कर सकते हैं। हालांकि इस सूचना में यह नहीं बताया गया था कि आतंकी किस जगह पर हमला करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि पिछले पांच साल से भारत पर समुद्री रास्ते से हमले के बारे में खुफिया एजेंसियों को सूचनाएं दी जा रही हैं। लश्कर के आतंकी भारत में हथियारों की खेप पहुंचाने के लिए अरब सागर के मार्ग का पहले से ही उपयोग करते रहे हैं और इस बात की जानकारी भारतीय खुफिया एजेंसियों को भी है। इन सबके बावजूद भारत के समुद्र तटीय इलाकों की सुरक्षा मजबूत न करने का ही नतीजा मुंबई हमलों के रूप में सामने आया है।
फैसल हारून से मिली जानकारियां : बांग्लादेश में पकड़े गए लश्कर के सदस्य फैसल हारून ने पूछताछ में बताया है कि पाकिस्तान में स्थित एक समूह भारत में विस्फोटकों और हथियारों की खेप पहुंचाने के लिए समुद्री रास्ते का उपयोग करता है। यह ग्रुप पाकिस्तान के हैदराबाद शहर में सक्रिय है और भारत में हुए कई आतंकी हमलों में इसी का हाथ रहा है।
बेहतर तालमेल पर जोर: मुंबई में हुए आतंकी हमलों के संबंध में केंद्र सरकार ने शनिवार को महाराष्ट्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) एमएल कुमावत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को आतंकी हमले की सूचना पहले दे दी गई थी लेकिन राज्य सरकार ने समय रहते ऐहतियाती कदम नहीं उठाए। उन्होंने तटरक्षक बल की कमजोरी को दूर करने और समुद्री सुरक्षा मंे लगी एजेंसियों के बीच बेहतर संवाद व सामंजस्य बिठाने पर विचार किया जा रहा है।
कुमावत ने विभिन्न राज्यों की पुलिस के आतंकवादी निरोधक दस्ते (एटीएस) को एनएसजी के कमांडो की तर्ज पर प्रशिक्षित किए जाने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा सकेगी, साथ ही एनएसजी के पहुंचने तक होने वाले नुकसान को भी रोका जा सकेगा।