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भोपाल. राजधानी की एक अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) के दो कर्मचारियों धन्नालाल सिरोही और राजकुमार शर्मा को दो साल की जेल और आठ हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश आरके भावे ने यह फैसला सुनाया।
वर्ष 1991 में व्यापम द्वारा पीएमटी और पीईटी की परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में राजकुमार शर्मा, रुचि गुप्ता, मनोज चौधरी और संजीव कुमार चौधरी सम्मिलित हुए थे। मंडल को शिकायत मिली थी कि कुछ कर्मचारियों ने रुपए लेकर उत्तरपुस्तिका में अंकित निशानों में फेरबदल कर कुछ विद्यार्थियों को पास करा दिया था। मामला जांच के लिए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को दिया गया था।
इस बात का खुलासा हुआ कि व्यापम के उच्च श्रेणी लिपिक धन्नालाल, तृतीय श्रेणी कर्मचारी राजकुमार शर्मा और डोलराज ने पैसा लेकर उत्तरपुस्तिका में काट-छांट की थी। तलाशी के दौरान धन्नालाल सिरोही के घर से 80 हजार रुपए व गोपनीय दस्तावेज मिले थे। जेवरात और गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए थे।
आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। ब्यूरो ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वर्ष 1995 में चालान अदालत में पेश किया था।
विशेष न्यायाधीश आरके भावे ने गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर अभियुक्त धन्नालाल सिरोही और राजकुमार शर्मा को दोषी मानते हुए दो साल की जेल और आठ हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने सबूतों के अभाव में डोलराज को बरी कर दिया।