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बैंगलुरू. मून मिशन पर पहुंचे देश के पहले अंतरिक्ष यान ‘चंद्रयान-1’ में लगे 11 उपकरणों में से एक मून इम्पेक्ट प्रोब (एमआईपी) ने बेहतरीन क्वालिटी के तीन हजार फोटो भेजे हैं। अंतरिक्ष यान के दो पे-लोड्स भी दिसंबर के मध्य से काम शुरू करने वाले हैं। यह जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख जी माधवन नायर ने शनिवार को यहां वल्र्ड स्पेस बिज अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस व प्रदर्शनी के मौके पर दी।
ताकि पसंदीदा कोण मिल सके : इसरो प्रमुख ने बताया कि चंद्रयान-1 के सभी उपकरण अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। वैज्ञानिकों द्वारा शुरू किए गए एक्सरोफोबिक कैमरे से शानदार क्वालिटी के चित्र प्राप्त हो रहे हैं, इनसे हमें चांद की सतह पर मौजूद गड्ढों और ऊंचे चोटियों के बारे में उपयोगी जानकारी मिली है। हमने सारे उपकरणों को एक-एक करके शुरू करने का फैसला किया है। इसरो के दो पे-लोड्स को दिसंबर मध्य में इसलिए शुरू किया जा रहा है ताकि इसके लिए सूर्य से पसंदीदा कोण मिल सके।
सही जगह पर लैंडिंग: नायर ने बताया कि एमआईपी के तीन उपकरणों ने शानदार काम किया है। चांद के दक्षिण ध्रुव पर लैंड करने के पहले एमआईपी ने 25 मिनट की यात्रा में करीब तीन हजार फोटो भेजे थे। बेहद नजदीकी तस्वीरें मिलने से साबित होता है कि इसने एकदम सही जगह पर लैंडिंग की थी। इसरो प्रमुख के अनुसार अंतरिक्ष यान के मास स्पेक्ट्रोमीटर ने भी उपयोगी जानकारियां भेजी हैं। गौरतलब है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कोई उपकरण भेजने वाला भारत दुनिया का पहला देश है।
अगला मिशन : नायर ने बताया फ्रेंच कोरू स्थित एरियन लांच व्हीकल से अगले माह के मध्य तक डब्ल्यूडीएम सैटलाइट छोड़ा जाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग से तैयार किया गया व्यावसायिक सैटेलाइट है। डब्ल्यूडीएम सैटेलाइट के अनुबंध से इसरो को तीन करोड़ अमेरिकी डालर मिले हैं। इसके बाद श्रीहरिकोटा से अगले साल के मध्य में ओशनसेट-2 व राडार इमेजिंग सैटेलाइट छोड़ने की भी योजना है।