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विश्व महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप

निग्बो सिटी (चीन). भारत की एमसी मैरीकॉम (४६ किलो) ने दुनिया की सबसे सफल महिला मुक्केबाज के तौर पर अपना लोहा फिर मनवाते हुए शनिवार को यहां विश्व महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में लगातार चौथी बार खिताब जीत लिया। हालांकि भारतीय टीम खिताब पर कब्जा बरकरार रखने से चूक गई। भारत को चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक मिले।

मैरीकॉम का खिताबी मुकाबला एक बार फिर दो साल पहले की तरह रोमानिया की स्टेलुटा डुटा से हुआ। मणिपुर की २५ साल की मैरी ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को ७-१ से मात देकर भारत को एकमात्र स्वर्ण पदक दिला दिया। पिछली बार नई दिल्ली में भी मैरी ने डुटा को हराकर ही खिताब जीता था।

सात सदस्यीय भारतीय टीम में मैरीकॉम के अलावा एन. उषा (५७ किग्रा) भी फाइनल में पहुंचीं, लेकिन चीन की क्विन जियान से १-६ से पराजय के बाद उन्हें रजत से ही संतोष करना पड़ा। सेमीफाइनल में पराजित छोटो लॉरा (५क् किलो) और एल. सरिता देवी (५२ किलो) को कांस्य पदक मिला।

दो साल से रिंग से बाहर थीं
नई दिल्ली में दो साल पहले तीसरी बार खिताब जीतने के बाद मैरी ने रिंग से दूर रहने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें अपने जुड़वां बच्चों को पालना था। इस साल एशियन चैंपियनशिप से उन्होंने वापसी की, लेकिन रजत से संतोष करना पड़ा। हालांकि वल्र्ड चैंपियनशिप में जाने से पहले उनकी तैयारी शानदार थी और इस महीने ही उन्होंने नेशनल खिताब जीता था।

चीन चैंपियन, भारत पांचवें स्थान पर
कुल चार पदक जीतकर भारत ने इस चैंपियनशिप में 18 अंक हासिल किए और वह पांचवें स्थान पर रहा। 52 अंकों के साथ मेजबान चीन ओवर ऑल चैंपियन बना। उसके मुक्केबाजों ने पांच स्वर्ण, दो रजत व चार कांस्य जीते। 20-20 अंकों के साथ तुर्की व रूस संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कनाडा (19 अंक) को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

परिवार की आर्थिक सहायता के लिए आईं खेलों में
मणिपुर के कांगाथेई गांव की रहने वाली मैरी अपने परिवार की आर्थिक सहायता के लिए खेलों में र्आई। पहले वे ऑल राउंडर एथलीट थीं और 400 मीटर दौड़ के अलावा जेवेलियन थ्रो में भाग लेती थी, लेकिन जब मणिपुर के स्टार बॉक्सर डिंको सिंह बैंकॉक में हुए एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने के बाद लौटे, तो उनसे प्रेरणा लेते हुए मैरी ने बॉक्सिंग में भाग्य आजमाने का फैसला किया। वर्ष 2000 में बॉक्सिंग शुरू करने वाली मैरी ने दो सप्ताह में ही इस खेल की आधारभूत ट्रेनिंग पूरी कर ली।

इसी साल उन्होंने स्टेट चैंपियनशिप जीत ली और जब अखबारों में फोटो छपी, तो उनकी प्रतिभा को लोगों ने पहचाना। 2000 में ही वेस्ट बंगाल में हुई ईस्ट इंडिया महिला बॉक्सिंग में उन्होंने स्वर्ण जीता। उनके मुक्कों की गूंज 2000 से 2005 तक लगातार नेशनल चैंपियनशिप में गूंजती रही। मैरी अब तक एशियन चैंपियनशिप सहित कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में अपनी क्षमता का लोहा मनवा चुकी हैं।





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