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भोपाल. राजधानी की एक अदालत ने एक उद्योगपति और उनके बेटे को चेक बाउंस मामले में चार करोड़ रुपए जुर्माने और एक साल जेल की सजा सुनाई है। जुर्माना जमा नहीं करने पर आरोपियों को तीन महीने अतिरिक्त जेल में रहना होगा। अदालत ने आरोपियों को 20 लाख रुपए की जमानत पर छोड़ा और अपील के लिए उन्हें एक महीने का समय दिया है।
लगभग आठ साल पहले भानू आयरन एंड स्टील लिमिटेड ने मप्र औद्योगिक विकास निगम से इंटर कापरेरेट डिपाजिट के तहत 14.5 करोड़ रुपए लिए थे। शॉर्ट टर्म लोन की इस राशि को वसूलने के लिए जब निगम ने कंपनी पर दबाव बनाया तो लगभग छह साल पहले कंपनी ने 3 करोड़ 11 लाख 62 हजार रुपए का एक चैक निगम को दिया। जब इसे निगम ने जमा कराया यह बाउंस हो गया। इसके बाद निगम प्रबंधन ने इस मामले में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत भोपाल की जिला अदालत में एक परिवाद दायर किया।
इसमें कंपनी के चेयरमेन बीके विश्नोई और मैनेजिंग डायरेक्टर अनूप विश्नोई को आरोपी बनाया गया था। निगम ने 18 मई 2001 को चैक का भुगतान न होने पर आरोपियों को नोटिस देकर भुगतान करने को कहा था। इसके बाद भी विश्नोई बंधुओं की ओर से भुगतान न करने पर चैक बाउंस का मामला अदालत में पेश किया गया था।
मजिस्ट्रेट अनिल कुमार सिंह ने सुनवाई के बाद आरोपी अनूप विश्नोई और वीके विश्नोई को चैक बाउंस के मामले का दोषी मानते हुए चार करोड़ रुपए के जुर्माने और एक साल की जेल की सजा सुनाई। मजिस्ट्रेट ने अपने फैसले में लिखा है कि जुर्माने की रकम अदा न करने पर आरोपियों को तीन महीने अतिरिक्त जेल में रहना होगा।