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ग्रह बनाते सौम्य-क्रूर

ग्रह-नक्षत्र. ग्रहों के प्रभाव से लोग सौम्य और क्रूर होते हैं। भगवान श्रीराम के 5 ग्रह उच्च के (सूर्य, मंगल, शुक्र, शनि, गुरु) एवं चंद्र स्वराशि का है। तृतीय भाव में उच्चस्थ राहु एवं ग्यारहवें भाव में बुध अत्यंत ही शुभदायक है। भाग्य में उच्चस्थ शुक्र, केतु के साथ अति शुभ है। लग्नेश स्वग्रही होकर लग्न भाव में वृद्धि कर रहा है।

वहीं भाग्येश लग्न में उच्च का होकर पंचम, नवम भाव को पूर्ण बल प्रदान कर रहा है। उच्च का शनि सुख भाव में बैठकर नीच दृष्टि से दशम राजभाव को देख रहा है एवं दशम भाव में उच्च सूर्य चतुर्थ भाव को नीच दृष्टि से देख रहा है। अत: राजा होते हुए भी उन्हें आजीवन कष्ट भोगना पड़ा एवं राजसुख से वंचित रहना पड़ा। अत: ज्योतिष नियमानुसार उच्च एवं स्वराशि के ग्रह एवं लग्न, चतुर्थ, सप्तम, दशम, पंचम, नवम भावों में शुभ ग्रह अत्यंत ही शुभ फल देते हैं।

एडोल्फ हिटलर की कुंडली में तीसरे पराक्रम भाव में स्वग्रही गुरु, चंद्र, केतु के साथ है, जो छठे भाव का मालिक है। साथ में कर्मक्षेत्र का मालिक चंद्रमा है। उच्च का केतु भी साथ है, जिसने गुरु की शक्ति को अत्यधिक बढ़ा दिया एवं विश्व का उच्चतम योद्धा, तानाशाह, महान पराक्रमी, सेनानायक बना। कर्मक्षेत्र में शनि ने, जो राजक्षेत्र भी है, अजेय बना दिया। वहीं उच्च का सूर्य जो ग्यारहवें भाव का मालिक है एवं द्वादेश भाग्येश बुध, लग्नेश एवं अष्टमेश शुक्र के चार ग्रहों का मिलन और उस पर गुरु, शनि की दृष्टि ने हिटलर को श्रेष्ठ सेनापति, शक्तिशाली शासक, क्रूर एवं अति पराक्रमी बना डाला।





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