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काश! थोड़ा जल्दी भेजते तो बच जाती कई जानें

मुंबई. देश की लालफीताशाही एक बार फिर अपने सुस्त रवैये के कारण सुर्खियों में है। इनकी लापरवाही ने नेशनल सिक्युरिटी गार्ड के दो सौ कमांडो को समय पर मुंबई पहुंचने नहीं दिया। आतंकियों ने जब मुंबई में कोहराम मचाकर पूरे देश को हिलाकर रख दिया था तब भी हमारे अफसर इस बात को लेकर विचार कर रहे थे कि कमांडो को भेजने के लिए विमान कैसे उपलब्ध कराया जाए ?

गृह मंत्रालय से स्वीकृति के बाद जब कमांडो मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे तब तक काफी देर हो चुकी थी। इसके बाद भी एक घंटे बाद बेस्ट की बसें एयरपोर्ट आईं जो उन्हें आतंकियों के कब्जे वाले होटल के करीब तक ले गईं। कमांडो फोर्स के पूर्व डायरेक्टर जनरल वेद मरवाह बताते हैं कि आदेश मिलने के कुछ ही मिनटों में कमांडो धावा बोलने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं। उन्हें इस तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे हमेशा अपने हथियार और गोला-बारूद समेत तैयार रहते हैं। पालम एयरपोर्ट के निकट ही उनका बेस है, कमांडो चौबीस घंटे तैयार रहते हैं। उन्हें मुंबई के लिए भेजना कुछ मिनटों की बात थी, पता नहीं इतना अधिक समय क्यों लगा?

15 मिनट में तैयार, छह घंटे का लंबा इंतजार
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार रात 12.45 पर 200 कमांडो को मुंबई भेजने की स्वीकृति दे दी थी। आदेश की जानकारी मिलते ही कमांडो कुछ देर में ही कूच करने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन उन्हें मुंबई पहुंचाने के लिए विमान रात 3.15 पर आया था। इच्छाशक्ति होती तो यह मात्र कुछ मिनट में संभव हो सकता था। एनएसजी के एक अधिकारी ने बताया कि हम रात एक बजे पूरी तरह तैयार हो चुके थे। पूरी तैयारी के साथ बैठे कमांडो इंतजार करते-करते बोर हो गए। इधर उच्च अधिकारी टेलीफोन के जरिये यह जानने की कोशिश करते रहे कि आखिर विमान कब आएगा? उन्होंने कहा कि ऑपरेशन में सबसे अहम होता है समय। आतंकी अपनी पोजीशन ले चुके थे, तब तक हमारे विमान का ही पता नहीं था।

अफसरों ने दी सफाई
आंतरिक सुरक्षा विभाग के विशेष सचिव एम.एल. कुमावत बताते हैं कि कैबिनेट सचिव मेरे साथ थे और हम पूरी रात व्यवस्था करने में लगे रहे। विमान हमें चंड़ीगढ़ से मिलने वाला था। एनएसजी के मुंबई में ऑपरेशन के लिए तैयार होने में समय लगा, इसके कारण देरी हुई।

और फिर हद हो गई इंतजार की
समय से काफी देरी से सुबह 5.15 पर मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे एनएसजी कमांडो को आतंकियों के कब्जे वाले होटल तक पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। कमांडो एक घंटे तक इंतजार करते रहे, फिर मुंबई पुलिस ने महानगर की सार्वजनिक नगर सेवा वाली कुछ बसें बुलाईं जिससे वे होटल ताजमहल की ओर रवाना हो सके। आतंकियों के कब्जे वाली इमारतों के करीब पहुंचकर कमांडो ने सुबह 7 बजे अपनी पोजीशन संभाली, लेकिन इसके बावजूद उनके पास होटल के भीतर की जानकारी वाला डिटेल मैप नहीं था।

ऑपरेशन में हुई देरी
एनएसजी चीफ जे.के. दत्ता ने बताया कि आतंकियों द्वारा कब्जे में लिए गए होटल के अंदर कहां-क्या है, इसके बारे में हमारे पास कोई जानकारी नहीं थी। हमने इसे जानने के लिए काफी कोशिश की, इससे हमें ऑपरेशन शुरू करने में काफी दिक्कतें हरुई।

एनएसजी पर एक नजर
नेशनल सिक्युरिटी गार्ड को ब्लैक कैट्स भी कहा जाता है। ये कमांडो काले रंग की वेशभूषा में होते हैं। इन्हें देश की सेवा करते हुए 22 साल हो चुके हैं। इसकी स्थापना नेशनल सिक्युरिटी गार्ड एक्ट 1985 के तहत हुई है। इनका मुख्य काम लक्षित क्षेत्र में आतंकियों का सफाया और क्षेत्र को कानून के हवाले करना है। धरती और आसमान में हाइजेक जैसी घटनाओं से निपटने के लिए इन्हें विशेष ट्रेनिंग दी गई है। विशेष परिस्थितियों में आतंकियों की धरपकड़ और उनसे निपटने के साथ ही बंधक बनाए गए लोगों को सकुशल छुड़ाने के लिए भी प्रशिक्षण दिया गया है।





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