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पितृ पर्वत पर विराजेंगे हनुमान

इंदौर. नगर निगम द्वारा कुछ साल पहले हरियाली लाने के उद्देश्य से एरोड्रम रोड पर पितृ पर्वत का विकास किया गया था। इस पर कई समाजों ने अपने पितरों की याद में तो किसी ने शहर को हरियाली देने के लिए पौधे लगाए हैं। यहीं पर 66 फीट ऊंची संकट मोचन हनुमान की मूर्ति की स्थापना की जाएगी। मूर्ति का निर्माण कार्य आधे से ज्यादा हो चुका है। मूर्ति अगले साल हनुमान जयंती पर स्थापित होगी।

हनुमान की मूर्ति को रामायण के सामने बैठे हुए मर्यादा पुरषोत्तम राम की भक्ति में लीन दिखाया जाएगा। बैठी हुई मुद्रा में मुख्य मूर्ति की ऊंचाई ६६ फीट है। मूर्तिकार प्रभात राय (ग्वालियर) का कहना है अगर मूर्ति की स्थापना खड़े रूप में की जाती तो इसकी सिर से लेकर पैर तक की लंबाई १३१ फीट होती। जिस रामायण के समक्ष बैठकर भगवान हनुमान भक्ति कर रहे हैं वो 70 बाय १५ फीट की बनाई गई है। इसकी ऊंचाई आठ फीट और रामायण के पन्नों की चौड़ाई क्रमश: ३५-३५ फीट होगी। हनुमानजी की गदा भी बनाई गई है जिसकी लंबाई ८५ फीट है। उनके दोनों हाथों में मंजीरे बनाए गए हैं जो ८ फीट के हैं।

2007 में हुई थी शुरुआत
अक्टूबर २क्क्७ में इस मूर्ति को बनाने के लिए मूर्तिकार प्रभात राय को आर्डर दिया था। श्री राय ने बताया मूर्ति बनाने के पहले इसका मिट्टी से एक मॉडल तैयार किया था जिसे देखने कई समाज के लोग आए थे। इसके बाद मॉडल को फाइनल किया गया था और उसके बाद इसका सांचा तैयार किया गया था। मूर्ति के निर्माण में जस्ता, शीशा, तांबा, रांगा, चांदी, सोना, प्लेटिनियम और लोहे जैसी अष्टधातुओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। श्री राय का कहना है इतनी ऊंची और अष्टधातु से बनी मूर्ति विश्व में पहली होगी। दुनिया का सबसे ऊंचा स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी कहलाता है वो भी अष्टधातु से नहीं बनाया गया है। उसमें केवल तांबा और पीतल का ही उपयोग किया गया है। श्री राय का कहना है मूर्ति लगभग 60 प्रतिशत तैयार हो गई है।

लगेगी मल्हारराव होलकर की प्रतिमा
इंदौर विकास प्राधिकरण लालबाग में महाराज मल्हारराव होलकर की प्रतिमा भी लगाने जा रहा है। अष्टधातु से बनने वाली होलकर महाराज की अश्व पर सवार प्रतिमा की कुल लंबाई (अश्व और प्रतिमा दोनों को मिलाकर) १४ फीट होगी। इसका वजन २.५ से ३ टन होगा। प्रतिमा की कुल लागत १७ लाख रुपए है। प्राधिकरण ने इसे बनाने के लिए जुलाई क्८ में ऑर्डर दिया था जिसे दिसंबर में लगाया जाना है और इसका काम अंतिम चरण में है। प्रतिमा बनकर तैयार है केवल फिनिशिंग का काम बचा है।





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