Breaking News 
bhaskar Web English


HomeNewsMetrosIndore Indore

साहस-लगन के धनी थे ‘विजय’

इंदौर. विजय सालसकर से मुलाकात 1982 में मेरे सहकर्मी श्याम सापले ने करवाई थी। तब उसने एम.कॉम. पूरा किया ही था। 1980 में गवली गैंग के दो-तीन लोगों के एनकाउंटर के बाद वह लाइम-लाइट में आया और फिर उससे बात करने की जुगत में भी पसीना आ जाता था।

मुंबई में हुए घटनाक्रम में शहीद हुए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालसकर के बारे में यह बात उनके निकटतम मित्रों में से एक शहर के ही उद्यमी एस.एस. वैद्य ने बताई। ज्योति कॉपर क्रॉफ्ट प्रा.लि. के टेक्निकल डायरेक्टर श्री वैद्य ने भास्कर को बताया एम.काम. के बाद गोरेगांव में मेरी कंपनी होने से मैं उसके काफी संपर्क में रहा। उसने महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्यम से 1983 में ही पुलिस सर्विस ज्वाइन कर ली। इस उपलब्धि का कारण शुरू से उसमें छिपे अदम्य साहस और काम के प्रति लगन का था।

तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अरविंद इनामदार का विजय को प्रोजेक्ट करने में अहम रोल था। इसके बाद गवली गैंग के 2-3 आदमियों को उसने क्या मारा, वह चर्चाओं में आ गया था। जीवन में करीब 80 एनकाउंटर करने वाले श्री सालसकर के बारे में श्री वैद्य ने बताया कि उसे बड़ा दु:ख होता था, किसी की जान लेते समय। 31 दिसंबर 2007 को व्यस्तता के बीच मैंने उसे बधाई मैसेज भेजा तो उसने फोन लगाया। उनका काम ही ऐसा था कि बात करने में भी सोचना पड़ता था कि वह कही ऑपरेशन में न हो।

एक बार ऐसा हुआ भी जब मैंने फोन लगाया तो उसने कहा 15 मिनट बाद लगाता हूं। जब बाद में फोन आया तो उसने बताया एक ऑपरेशन में थे। सितंबर में मैं मुंबई गया भी था। कामले ने बताया था कि वह आएगा। रात 11 बजे उसका फोन आया कि कहीं फंस गया हूं, बाद में मिलते हैं। इसके बाद 26 की रात ढाई बजे गुजरात से बड़े भाई का फोन आया कि तेरा दोस्त नहीं रहा। श्री वैद्य कहते हैं एक बात और जो उसमें खास थी कि कभी किसी व्यसन को उसने छुआ तक नहीं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: