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इंदौर. ब्लड की पूर्ति और डोनर्स को जागरूक करने के लिए अब उच्च शिक्षा विभाग एक अनोखी पहल करने जा रहा है। विभाग दिसंबर में एक नई वेबसाइट बनाने जा रहा है जिसमें प्रदेशभर के कॉलेजों के ब्लड डोनर कॉन्टेक्ट नंबर के साथ एक जगह उपलब्ध होंगे। योजना की शुरुआत में ही ब्लड देने वाले इच्छुक ९ हजार स्टूडेंट्स अपना नाम भी दे चुके हैं।
30 हजार ब्लड डोनर होंगे वेबसाइट पर
वेबसाइट पर प्रदेशभर के करीब 130 कॉलेजों के 30 हजार से ज्यादा स्टूडेंट जुड़ेंगे जिनमें से अधिकतर कॉलेजों ने अपनी लिस्ट भोपाल भेज भी दी है। अभी तक की लिस्ट में खास छोटे शहरों के कॉलेजों ने सबसे अधिक नाम शासन को भेजे हैं।
शपथ पत्र भरना होगा अनिवार्य
वेबसाइट पर फर्जी डोनर न आएं, इसके लिए विभाग ने कॉलेजों को शपथ पत्र भी भेजे हैं। इसमें पूरी जानकारी के साथ स्टूडेंट्स से पूछा गया है कि यदि वे स्वतंत्र रूप से ब्लड देने के लिए तैयार हों, तभी नाम रजिस्टर्ड कराएं। उन्हें यह भी कहा गया है कि साइट पर नाम अपलोड होने के बाद लंबे समय तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
लड़कियों का प्रतिशत ज्यादा
इंदौर सहित खरगोन, बड़वानी, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बुरहानपुर और खंडवा के ९ हजार स्टूडेंट्स के नाम भोपाल पहुंच चुके हैं। इसमें ब्लड देने वालों में छोटे शहर की लड़कियों का प्रतिशत लड़कों से कहीं अधिक है।
एनएसएस के सहयोग से होगा काम
योजना के क्रियान्वयन की शुरुआत इंदौर एनएसएस से ही हुई थी। दो महीने पहले राष्ट्रीय सेवा योजना ने योजना मंजूरी के लिए उच्च शिक्षा विभाग भोपाल को भेजी थी जहां उच्च अधिकारियों को प्रयास अच्छा लगा और उन्होंने पूरे प्रदेश में इस तरह का प्रयोग करने के लिए कार्य शुरू कर दिया। शहर में ब्लड डोनेट करने वालों का रिकॉर्ड एनएसएस विभाग में जमा किया जा रहा है जिन्हें दिसम्बर में भोपाल भेजा जाना है। एनएसएस प्रभारी नसरीन रहमान शेख ने बताया इसमें एनएसएस मान्यता प्राप्त संस्थाओं से नाम लिए जा रहे हैं।
२४ घंटे कर सकते हैं संपर्क
उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर स्टूडेंट्स की प्रोफाइल अपलोड होने के बाद विभाग द्वारा प्रदेशभर के हॉस्पिटल, पुलिस स्टेशन और एनजीओ को एक आईडी पासवर्ड दिया जाएगा जिसके द्वारा डोनर से २४ घंटे में कभी भी संपर्क किया जा सकेगा।
दिसंबर में बनेगी वेबसाइट
ब्लड की कमी दूर करने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में यूथ की संख्या सबसे अधिक है और अधिकतर कॉलेज से जुड़े हैं इसलिए यह पहल महत्वपूर्ण हो सकती है। राज्य शासन के आदेश अनुसार दिसंबर में डाटा जुटाकर वेबसाइट का डेवलपिंग कार्य कराया जाएगा।
- डॉ. महेंद्र गिरि, राज्य संपर्क अधिकारी, उच्च शिक्षा विभाग भोपाल